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पेट में 15.5 किलो का ट्यूमर, महिला चल तक नहीं पाती थी, डॉक्टरों ने किया ऑपरेशन

Ovarian Tumor Surgery : राजधानी पटना स्थित पीएमसीएम में एक महिला के पेट से 15 किलो का ओवेरियन ट्यूमर निकाला गया है। उसे लंबे समय से चलने तक में दिक्कत हो रही थी।

पेट में 15.5 किलो का ट्यूमर, महिला चल तक नहीं पाती थी, डॉक्टरों ने किया ऑपरेशन
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By Ranjan Kumar

Patna Women Ovarian Tumor Surgery : पटना स्थित पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के डॉक्टरों ने महिला के पेट से 15.5 किलोग्राम का ओवेरियन ट्यूमर निकाला है। महिला लंबे समय से पेट में सूजन, दर्द और भारीपन से परेशान थी। उसने शुरुआत में इसे सामान्य परेशानी समझा, लेकिन धीरे-धीरे उसका पेट असामान्य रूप से बढ़ने लगा। इस कारण उसे चलने और दैनिक कार्यों में भी कठिनाई होने लगी थी।

परिजन उसे इलाज के लिए पीएमसीएच लाए तो जांच बाद डॉक्टरों ने पाया कि महिला के पेट में बड़ा ओवेरियन ट्यूमर विकसित हो गया है। यह ट्यूमर आसपास के अंगों पर दबाव डाल रहा था। उससे स्थिति गंभीर हो गई थी। डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। इस सर्जरी की विशेषता थी कि इसे अस्पताल के लेबर रूम में अंजाम दिया गया। इतनी बड़ी सर्जरी ऑपरेशन थिएटर में की जाती है, लेकिन डॉक्टरों ने उपलब्ध संसाधनों के साथ इस चुनौती को स्वीकार किया।

इन डॉक्टरों ने किया ऑपरेशन

ऑपरेशन का नेतृत्व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रो. मीनू शरण ने किया। उनकी टीम में ऑन्को सर्जन डॉ. नवीन, डॉ. नीना अग्रवाल, डॉ. अंजली, डॉ. माधुरी शामिल थीं। इन्होंने मिलकर कई घंटों तक चली इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक किया।

ये चुनौतियां आईं

डॉक्टरों के अनुसार यह ऑपरेशन जटिल था। ट्यूमर इतना बड़ा था कि उसे निकालते समय आसपास के अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा था। साथ ही ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव को नियंत्रित रखना भी बड़ी चुनौती थी। टीम ने विशेषज्ञता और अनुभव का परिचय देते हुए हर चुनौती का सामना किया। सटीक योजना और बेहतर समन्वय से ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।

दुर्लभ मामलों में दिखता है इतना बड़ा ट्यूमर

डॉक्टरों का कहना है कि 15.5 किलोग्राम का ओवेरियन ट्यूमर बेहद दुर्लभ है। अमूमन ऐसे ट्यूमर धीरे-धीरे विकसित होते हैं। शुरुआती लक्षण सामान्य लगने के कारण मरीज इन्हें नजरअंदाज करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समय रहते जांच और इलाज नहीं कराया जाए तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। इस मामले में भी थोड़ी और देरी होती तो मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।

मरीज की हालत स्थिर

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही। उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। लगातार उसकी सेहत पर नजर रखी जा रही। डॉक्टरों का कहना है कि आने वाले दिनों में उसकी स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है।

समर्पण की मिसाल

अस्पताल प्रशासन ने इस टीम वर्क और डॉक्टरों के समर्पण का परिणाम बताया है। सीमित संसाधनों के बावजूद इतनी बड़ी और जटिल सर्जरी को अंजाम देना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही। पीएमसीएच ने साबित किया है कि सरकारी अस्पतालों में भी उच्च स्तर की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं। यह ऑपरेशन न केवल एक महिला की जान बचाई, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में प्रेरणादायक उदाहरण भी बन गया है।

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