Bihar news: देशव्यापी दलहन क्रांति का औपचारिक शुभारंभ, केंद्रीय कृषि मंत्री हुए शामिल
Bihar news: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय दलहन परामर्श एवं रणनीति कार्यक्रम के माध्यम से देशव्यापी दलहन क्रांति का औपचारिक शुभारंभ हुआ,

Bihar news: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय दलहन परामर्श एवं रणनीति कार्यक्रम के माध्यम से देशव्यापी दलहन क्रांति का औपचारिक शुभारंभ हुआ, जिसमें उन्होंने सहभागिता की। इस दौरान बिहार कृषि मंत्री, राम कृपाल यादव ने बताया कि मध्य प्रदेश के सीहोर जिला के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से आज देश की दलहन नीति एवं किसान-केंद्रित कृषि विमर्श में एक नया अध्याय जुड़ा।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्र-स्तरीय परामर्श कार्यक्रम के अवसर पर मध्यप्रदेश के सीहोर स्थित शुष्क क्षेत्रों में कृषि अनुसंधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (ICARDA) परिसर में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा प्रशासनिक भवन, किसान प्रशिक्षण केंद्र एवं पादप नोमिक्स, पादप ऊतक संवर्धन, पादप प्रजनन तथा पादप रोग विज्ञान से संबंधित अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का विधिवत उद्घाटन किया गया।
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि बिहार को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग एवं ठोस नीति समर्थन की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत बिहार की भौगोलिक, जलवायु एवं कृषि संरचना को ध्यान में रखते हुए राज्य के लिए एक विशेष दलहन पैकेज स्वीकृत किया जाना आवश्यक है। बिहार को वर्षा-आधारित खेती वाला राज्य मानते हुए दलहन विकास हेतु अलग से विशेष पैकेज प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया है।
मंत्री ने कहा कि अरहर, चना, मसूर, उड़द एवं मूंग को बिहार की राज्य-विशेष दलहन फसलों के रूप में चिन्हित किया जाना चाहिए। साथ ही, राज्य में दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के सीड हब की स्थापना तथा 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता से उच्च उत्पादक, अल्प अवधि एवं रोग-रोधी बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि दलहन उत्पादन में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए क्लस्टर आधारित खेती मॉडल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत बिहार में ब्लॉक एवं क्लस्टर आधारित कार्यक्रमों को विशेष रूप से लागू करते हुए प्रति क्लस्टर सिंचाई, बीज, कृषि यंत्र एवं प्रशिक्षण का समेकित पैकेज उपलब्ध कराया जाए। सूक्ष्म सिंचाई एवं जल संरक्षण को प्रोत्साहित करते हुए दलहन क्षेत्रों में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर पर 90 प्रतिशत तक केंद्रीय अनुदान तथा वर्षा-आधारित क्षेत्रों में फार्म पोंड एवं जल संचयन को मिशन से जोड़ा जाए।
मंत्री ने दलहन बुवाई, कटाई एवं थ्रेसिंग हेतु विशेष कृषि यंत्रों पर अतिरिक्त केंद्रीय सहायता देने, कस्टम हायरिंग सेंटर को दलहन मिशन से जोड़ने तथा दलहनी फसलों की एमएसपी पर प्रभावी एवं सुनिश्चित खरीद व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके लिए नाफेड एवं एफसीआई के माध्यम से स्थायी खरीद केंद्रों की स्थापना का भी अनुरोध किया गया।
उन्होंने कहा कि बिहार में दलहन प्रसंस्करण एवं वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने के लिए दाल मिल, प्रोसेसिंग एवं पैकेजिंग इकाइयों हेतु विशेष पूं अनुदान का प्रावधान किया जाए तथा कृषक उत्पादक संगठन (FPO )आधारित प्रोसेसिंग मॉडल को प्रोत्साहित किया जाए। इसके साथ ही कृषि विज्ञान केंद्रों को दलहन अनुसंधान हेतु विशेष परियोजना अनुदान, किसानों के लिए फील्ड डेमो, मॉडल प्लॉट एवं डिजिटल एडवाइजरी की व्यवस्था आवश्यक है।
मंत्री ने कहा कि बिहार बाढ़ एवं सुखाड़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बार-बार प्रभावित होता है, इसलिए दलहन फसलों के लिए कम प्रीमियम पर व्यापक फसल बीमा एवं मौसम आधारित क्षति पर त्वरित क्षतिपूर्ति की व्यवस्था की जाए। केंद्र–राज्य समन्वय को मजबूत करने के लिए बिहार हेतु केंद्रीय–राज्य संयुक्त दलहन टास्क फोर्स के गठन का भी प्रस्ताव रखा गया। अंत में उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य है कि अगले पाँच वर्षों में बिहार को दलहन में आत्मनिर्भर राज्य बनाया जाए।
दलहन केवल दाल नहीं, बल्कि गरीब की थाली का प्रमुख प्रोटीन, बच्चों के स्वास्थ्य की नींव, माताओं के पोषण का आधार और मिट्टी की उर्वरता का प्राकृतिक रक्षक है। यह नाइट्रोजन प्रदान कर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाती है और जलवायु परिवर्तन के दौर में पर्यावरण-अनुकूल खेती का सशक्त समाधान प्रस्तुत करती है। बिहार एक कृषि-प्रधान राज्य है, जहाँ अधिकांश किसान छोटे एवं सीमांत हैं। वर्ष 2024–25 में राज्य में 4.48 लाख हेक्टेयर में दलहन की खेती से 3.93 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ, फिर भी मांग की पूर्ति हेतु बाहरी निर्भरता बनी हुई है।
कृषि मंत्री ने कहा कि दलहन आत्मनिर्भरता मिशन एक निर्णायक पहल है, जिसके तहत उन्नत बीज, क्लस्टर आधारित खेती, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण इकाइयाँ की व्यवस्था की गई है। सरकार का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में दलहन क्षेत्र और उत्पादन को दोगुने से अधिक बढ़ाकर बिहार को दलहन में आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे किसानों की आय बढ़े और पोषण सुरक्षा सुदृढ़ हो।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा बिहार में दलहन को बढ़ावा देने हेतु 93.75करोड़ रुपए का चेक प्रदान किया गया। कृषि मंत्री राम कृपाल यादव द्वारा बिहार में भी इसी तरह का दलहन पर राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित करने हेतु केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को आमंत्रित किया गया। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने भी इसपर सहमति जताई तथा बिहार में भी दलहन पर राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का अनुरोध किया।
