कौन है IAS संजीव हंस? गैंगरेप का केस, 10 महीने जेल- फिर बहाली, अब 1 करोड़ घूस लेने के आरोप में CBI ने FIR किया दर्ज
IAS Sanjeev Hans News: आईएएस संजीव हंस पर सीबीआई ने एक और केस दर्ज किया है. सीबीआई ने आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 1 करोड़ की रिश्वत लेने के मामले में उनपर FIR दर्ज किया है.

IAS Sanjeev Hans FIR: 24 मार्च 2026, बिहार के सीनियर आईएएस संजीव हंस की मुश्किलें कम होने के नाम ही नहीं ले रहा है. आईएएस संजीव हंस पर सीबीआई ने एक और केस दर्ज किया है. सीबीआई ने आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 1 करोड़ की रिश्वत लेने के मामले में उनपर FIR दर्ज किया है.
क्या है पूरा मामला
आईएएस संजीव हंस पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रहने के दौरान 1 करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप है. दिल्ली स्थित कार्यालय में संजीव समेत 8 पर केस दर्ज किया है. इस मामले में ईडी ने ही जांच में पाया था कि संजीव ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान यह घूस ली थी.
उस दौरान 3 जुलाई 2014 से 30 में 2019 तक भारत सरकार में उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री के निजी सचिव थे. निजी सचिव रहते हुए आईएएस ने मुंबई की एक रियल्टी फर्म आरएनए कॉर्प से राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) से अनुकूल फैसला दिलवाने के लिए 1 करोड़ की रिश्वत ली थी. उस दौरान आईएएस संजीव हंस के मित्र विपुल बंसल फर्म में कार्यरत थे और इस सौदे में बिचौलिया की भूमिका निभा रहे थे. विपुल बंसल ने आईएएस हंस और फर्म के प्रमोटर अनुभव अग्रवाल के बीच बैठक करवाई थी.
सीबीआई की जांच में पता चला, 1 करोड़ कीरिश्वत की रकम को एक बार नहीं बल्कि कई किस्तों में अलग-अलग बैंक अकाउंट से आईएएस ने लिए थे. जिसमे उनके करीबी शामिल थे. मामले में आईएएस समेत विपुल बंसल, अनुभव अग्रवाल, पुष्पराज बजाज, शादाब खान, देवेंद्र सिंह आनंद, मुकुल बंसल और 'मैसर्स ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स' पर केस दर्ज हुआ है.
कौन है आईएएस संजीव हंस
नाम: संजीव हंस
जन्म: 19 अक्टूबर 1973, पंजाब
शिक्षा: सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक
बैच: 1997 बैच, बिहार कैडर
वर्तमान पद: बिहार राजस्व बोर्ड केअतिरिक्त सदस्य
संजीव हंस कैसे बने आईएएस
संजीव हंस बिहार कैडर के 1997 बैच के आईएएस अफसर हैं. वह मूलतः पंजाब राज्य के रहने वाले हैं. उनका जन्म 19 अक्टूबर 1973 को हुआ हैं. उनके पिता राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे. पिता की ही प्रेरणा से संजीव ने आईएएस अफसर बनने के बारे में सोचा. संजीव ने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. बीटेक करने के बाद यूपीएससी क्रैक कर आईएएस बने हैं.
प्रोफेशनल करियर कैसे रहा
संजीव हंस ने 21 अप्रैल 1998 को आईएएस की सर्विस ज्वाइन की हैं. लाल बहादुर शास्त्री प्रशिक्षण अकादमी मसूरी से ट्रेनिंग खत्म करने के पश्चात उन्हें फील्ड ट्रेनिंग के लिए बिहार के बांका जिले में एसडीएम के पद पर नियुक्ति मिली. जिसके बाद वे कई जिलों के कलेक्टर रहें. विभिन्न मंत्रालय एवं भी उन्होंने काम संभाला. जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने दक्षिणी बिहार के तीन जिलों में बाढ़ के पानी को पीने योग्य पानी के रूप में लाने वाली एक अभूतपूर्व जल लिफ्ट परियोजना गंगा जल आपूर्ति योजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
किन किन पदों पर रहे
जल संसाधन के अलावा स्वास्थ्य विभाग के भी प्रमुख सचिव संजीव हंस रहें. सामान्य प्रशासन विभाग के जांच आयुक्त भी संजीव हंस रहें. संजीव हंस वर्तमान में बिहार ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव व बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड पटना के एमडी रहे. उनके पास बिहार स्टेट हाइड्रोइलेक्ट्रिक कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएचपीसी) के निदेशक तथा ब्रेडा का जिम्मेदारी संभाला. वर्तमान में वो बिहार राजस्व बोर्ड का अतिरिक्त सदस्य की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
आईएएस संजीव हंस पर और क्या आरोप है
आईएएस संजीव हंस का विवादों से पुराना नाता है. उनपर महिला से गैंगरेप, आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग समेत कई केस दर्ज है. दस महीने उन्हें जेल में भी रहना पड़ा.
उन पर्व पूर्व विधायक गुलाब यादव पर एक महिला ने महिला आयोग का सदस्य बनाने के बहाने होटल बुलाकर बंदूक की नोंक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था. महिला का दावा था कि उसका बच्चा आईएएस संजीव हंस का है. जब इस आरोप की जांच शुरू हुई तो आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया. जिसके बाद ED ने मामले की जांच की. मनी लॉन्ड्रिंग मामले की ईडी की जांच और बलात्कार के आरोप के बाद नीतीश सरकार ने उन्हें सभी पद से हटा दिया था. उनपर आरोप है अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए कई संपत्ति अर्जित की. जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया. IAS संजीव हंस के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों का चार्जशीट भी दायर हुआ था .
