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Republic Day 2024: कर्तव्य पथ में आदिम जनसंसद मुरिया दरबार पर केंद्रित झांकी में दिखेगी जनजातीय कला एवं संस्कृति की झलक

Republic Day 2024: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली रवाना हो रही झांकी टीम की बालिकाओं से की चर्चा। कहा - आप सभी के लिए छत्तीसगढ़ की महान आदिवासी संस्कृति को देश की जानता के सम्मुख प्रस्तुत करना एक बड़ी जिम्मेदारी, अच्छी प्रस्तुति देकर बढ़ाएं छत्तीसगढ़ का मान

Republic Day 2024: कर्तव्य पथ में आदिम जनसंसद मुरिया दरबार पर केंद्रित झांकी में दिखेगी जनजातीय कला एवं संस्कृति की झलक
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By Sanjeet Kumar

Republic Day 2024: रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर छत्तीसगढ़ की झांकी बस्तर की प्राचीन जनसंसद मुरिया दरबार को प्रदर्शित करने आज नई दिल्ली रवाना हो रही बालिकाओं की टीम से चर्चा की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बालिकाओं की टीम से चर्चा में कहा कि हम सबके लिए यह बड़े सौभाग्य का विषय है कि गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ की झांकी राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ में प्रदर्शित की जा रही है। छत्तीसगढ़ से इस बार मुरिया दरबार पर केंद्रित झांकी के लिए आप सभी दिल्ली जा रहे हैं। आप सभी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।

साय को जब उनके प्रस्थान की सूचना अधिकारियों द्वारा दी गई तो उन्होंने तत्काल उन बच्चियों से बात करवाने को कहा और दिल्ली के लिए अपनी ट्रेन पकड़ने के लिए दुर्ग रेलवे स्टेशन पे मौजूद इन बालिकाओं से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत की। साय ने उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। उन्होंने बालिकाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियों ने हमेशा प्रदेश का नाम ऊंचा किया आज एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस परेड पर पूरे विश्व की दृष्टि हमारे भारतवर्ष पर रहती है। यह एक ऐसा अवसर होता है जहां देशभर की कला संस्कृति से अवगत होने का मौका मिलता है और इन सब बालिकाओं को छत्तीसगढ़ की महान और प्राचीन आदिवासी भारतीय संस्कृति को निरूपित करने का मौक़ा मिला है। -साय ने विश्वास जताया कि अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से हमारी बेटियां छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और पुरातन परंपराओं को देश ही नहीं बल्कि वैश्विक मानचित्र पर पहचान दिलाने में कामयाब होंगी। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर समूह की बालिकाओं से अनौपचारिक चर्चा करते हुए उनके नाम व उनकी भूमिका के बारे में भी पूछा। अपने बीच,अप्रत्याशित रूप से और यात्रा के ठीक पहले, मुख्यमंत्री को पाकर अत्यंत उत्साह में दिखीं और झांकी में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का निश्चय दिखाया। दुर्ग स्टेशन से दिल्ली रवाना हो रही बालिकाओं की टीम ने मुख्यमंत्री साय से कहा कि वे सभी अपनी प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाएंगे।

जनसंपर्क विभाग के आयुक्त मयंक श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ राज्य की झांकी भारत सरकार द्वारा प्रदत्त थीम भारत लोकतंत्र की जननी पर आधारित है। छत्तीसगढ़ की झांकी बस्तर की आदिम जनसंसद मुरिया दरबार जनजातीय समाज में आदि-काल से उपस्थित लोकतांत्रिक चेतना और परंपराओं को दर्शाती है, जो आजादी के 75 साल बाद भी राज्य के बस्तर संभाग में जीवंत और प्रचलित है। देश के 28 राज्यों के बीच कड़ी प्रतियोगिता के बाद छत्तीसगढ़ की झांकी बस्तर की आदिम जनसंसद मुरिया दरबार को इस साल नई दिल्ली में होने वाली गणतंत्र-दिवस परेड के लिए चयनित किया गया है।

नई-दिल्ली स्थित कर्तव्यपथ पर होने वाली परेड के लिए 28 में से 16 राज्यों का चयन किया गया है। झांकी का अनूठा विषय और डिजाइन रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति को रिझाने में कामयाब रहा। इस झांकी में केंद्रीय विषय आदिम जन-संसद के अंतर्गत जगदलपुर के मुरिया दरबार और लिमऊ-राजा को दर्शाया गया है।

गौरतलब है कि यह झांकी भारत में लोकतंत्र के जन्म और विकास की कहानी सप्रमाण प्रस्तुत करती है। झांकी का सामने का हिस्सा दर्शा रहा है कि बस्तर का जनजातीय समाज आदिकाल से लेकर अब तक स्त्री प्रधान रहा है। अपनी पारंपरिक वेशभूषा में एक स्त्री को अपनी बात रखते हुए दर्शाया गया है। मध्य भाग में बस्तर की आदिम जनसंसद को दर्शाया गया है, जिसे मुरिया दरबार के नाम से जाना जाता है।

मुरिया दरबार बस्तर दशहरे का एक सार्थक प्रजातांत्रिक और सर्वमान्य आकर्षण है। झांकी के पीछे के हिस्से में बस्तर की प्राचीन राजधानी बड़े डोंगर में स्थित लिमऊ राजा नाम के स्थान को दर्शाया गया है। लोककथाओं के मुताबिक आदि काल में जब कोई भी राजा नहीं था, तब जनजातीय समाज एक नीबू को पत्थर के प्राकृतिक सिंहासन पर रखकर आपस में ही निर्णय ले लिया करता था। झांकी की सजावट जनजातीय समाज की शिल्प-परंपरा के ‘‘बेलमेटल और टेराकोटा शिल्पों‘‘ से की गई है। बेलमेटल शिल्प का नंदी सामाजिक आत्मविश्वास और सांस्कृतिक सौंदर्य का प्रतीक है। टेराकोटा शिल्प का हाथी लोक की सत्ता का प्रतीक है।

Sanjeet Kumar

संजीत कुमार: छत्‍तीसगढ़ में 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय। उत्‍कृष्‍ट संसदीय रिपोर्टिंग के लिए 2018 में छत्‍तीसगढ़ विधानसभा से पुरस्‍कृत। सांध्‍य दैनिक अग्रदूत से पत्रकारिता की शुरुआत करने के बाद हरिभूमि, पत्रिका और नईदुनिया में सिटी चीफ और स्‍टेट ब्‍यूरो चीफ के पद पर काम किया। वर्तमान में NPG.News में कार्यरत। पंड़‍ित रविशंकर विवि से लोक प्रशासन में एमए और पत्रकारिता (बीजेएमसी) की डिग्री।

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