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CG Politics: बस्तर से निकलती है छत्तीसगढ़ की सत्ता! कांग्रेस, बीजेपी का फोकस इसी पर, मोदी के बाद आज प्रियंका का दौरा

CG Politics: बस्तर से निकलती है छत्तीसगढ़ की सत्ता! कांग्रेस, बीजेपी का फोकस इसी पर, मोदी के बाद आज प्रियंका का दौरा
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By Kapil Markam

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में बहुत पुरानी कहावत है। ये कहावत सत्य भी है और तथ्य भी कि सूबे की सत्ता का सिंहासन उसे ही मिलता है, जिसे बस्तर का साथ मिलता है। मौजूदा सरकार को बनाने में बस्तर बड़ी भूमिका रही है। और 15 साल सरकार में रही भाजपा की भी।

लगातार आदिवासियों के हक की आवाज उठाकर विपक्ष बस्तर में बाजी पलटने के लिए बेचैन नजर आ रही है। लेकिन कांग्रेस भी अपनी पकड़ जरा भी कम नहीं करना चाहती। भाजपा ने परिवर्तन यात्रा की शुरुआत बस्तर से की, पीएम नरेंद्र मोदी की सभा हुई तो आज प्रियंका गांधी बस्तर के कांकेर में मेगा शो करने जा रही हैं। खास बात ये है कि बस्तर की सरजमीं से ही कांग्रेस ने 12 अप्रैल को 'भरोसे के सम्मेलन' की शुरूआत की थी। एक बार फिर कांकेर के गोविंदपुर मैदान में पंचायती राज्य एवं नगरीय निकाय सम्मेलन होने जा रहा है। जहां कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी शामिल होंगी। साथ ही एक सभा को भी संबोधित करेंगी।

866 करोड़ रुपए की मिलेगी सौगात

कांग्रेस का दावा है कि इस सभा में करीब एक लाख से ज्यादा लोग शामिल होंगे। प्रियंका गांधी के दौरे को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बीएसएफ और सीआरपीएफ की टुकड़ी के अलावा करीब 500 से ज्यादा पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे पर नजर रखे हुए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में कांकेर जिले को 866 करोड़ रुपए के 518 विकास कार्यों की सौगात भी मिलेगी। पिछले सात महीने के दौरान ये प्रियंका गांधी का चौथा छत्तीसगढ़ दौरा है। कांकेर के इस दौरे से पहले 21 सितंबर को प्रियंका गांधी भिलाई के महिला समृद्धि सम्मेलन में शामिल हुई थीं। उससे भी पहले फरवरी महीने में रायपुर पहुंची थीं, तब उनका जोशीला स्वागत हुआ था। कांग्रेस बस्तर में कोई चूक नहीं चाहती। यही वजह है कि लगातार उसके केंद्रीय नेतृत्व का यहां दौरा कार्यक्रम बनाया जा रहा है। प्रियंका गांधी ही दूसरी बार कांकेर पहुंच रही हैं, लिहाजा सवाल यही है कि कांग्रेस की पकड़ को प्रियंका मजबूत बनाए रखने में कितनी मददगार साबित होंगी?

सभा का सियासी समीकरण

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के हुए हर चुनाव बस्तर की बड़ी भूमिका रही है। करीब 70 फीसद आदिवासी आबादी, ऊपर से पुरुषों की अपेक्षा महिला मतदाताओं की अधिक संख्या के कारण बस्तर में राजनीतिक दलों की अपनी अलग रणनीति होती है। यहां विकास से ज्यादा महत्व जनकल्याणकारी सेवाएं, योजनाएं और कार्यक्रम चुनाव को प्रभावित करते हैं। जनता का विश्वास जीतने वाली पार्टी प्रदेश की सत्ता पा लेती है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में राजनीतिक दलों और उनके शीर्ष नेताओं के मुंह से बार-बार सत्ता का रास्ता बस्तर से निकलने की बात सुनने को मिलती है। विधानसभा चुनाव का समय नजदीक है। दोनों बड़े दल कांग्रेस और भाजपा में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। छोटे दल भी तैयारी में हैं और इन्होंने अपने प्रत्याशी भी तय कर रखे हैं। कांकेर में प्रियंका गांधी के दौरे के पीछे कई सियासी समीकरण हैं। इस जिले की तीन विधानसभा सीट कांकेर, भानुप्रतापपुर और अंतागढ़ पर कांग्रेस काबिज है। कांकेर से कांग्रेस विधायक शिशुपाल शोरी हैं। भानुप्रतापपुर से कांग्रेस विधायक सावित्री मंडावी और अंतागढ़ से कांग्रेस विधायक अनूप नाग हैं। इन सीटों को कांग्रेस से छीनने के लिए भाजपा पूरी जोर लगा रही है। लेकिन कांग्रेस भी अपनी पकड़ मजबूत करते हुए लगातार केंद्रीय नेताओं का दौरा करा रही है।

सत्ता की चाबी

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 2003 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में बस्तर की 12 विधानसभा सीटों में से 11 सीटों पर भाजपा का कब्जा था। तब कांग्रेस के पास सिर्फ एक ही सीट बची थी। साल 2008 के चुनाव में भी यही स्थिति थी। लेकिन जोर आजमाइश के बाद 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने बस्तर की 4 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की। भाजपा के पास कुल 8 सीटें बची। लेकिन 2018 के चुनाव में बदलाव की ऐसी लहर चली कि 12 में से 11 सीटों पर कांग्रेस ने परचम लहराया। सिर्फ दंतेवाड़ा सीट से भाजपा के भीमा मंडावी चुनाव जीते थे। उनकी हत्या के बाद जब उपचुनाव हुए तो बस्तर की ये इकलौती सीट भी भाजपा के हाथ से जाती रही। यहां कांग्रेस की देवती कर्मा की जीत हुई।

जोर आजइमाइश कर रही बेचैन भाजपा

बस्तर की सभी 12 विधानसभा सीटों से बाहर हुई भाजपा वापसी के लिेए बेचैन है। करारी हार के बाद इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए भाजपा अपनी तरफ से पूरी जोर आजमाइश कर रही है। परिवर्तन यात्रा का आगाज भाजपा ने बस्तर के दंतेवाड़ा से ही किया। छत्तीसगढ़ के विधायकों के साथ अन्य राज्यों के विधायकों को भी लगातार बस्तर के 12 विधानसभा सीटों में भेजकर चुनावी तैयारी कराई। बस्तर में पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़ी सभा कर चुके हैं। इस साल अमित शाह, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा जैसे भाजपा के दिग्गज नेता दौरा कर चुके हैं।

Kapil Markam

कपिल मरकाम बिलासपुर चौकसे इंजिनियरिंग कॉलेज से ग्रेजुएट करने के बाद पत्रकारिता को पेशा बनाया। वर्तमान में NPG.NEWS से जुड़े हुए है। मूलतः मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के रहने वाले हैं।

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