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भीमा कोरेगाँव केस: अधिवक्ता सुधा भारद्वाज की ज़मानत..डिफ़ॉल्ट बेल को हाईकोर्ट ने स्वीकारा..ज़मानत की शर्तें विशेष अदालत NIA तय करेगी

भीमा कोरेगाँव केस: अधिवक्ता सुधा भारद्वाज की ज़मानत..डिफ़ॉल्ट बेल को हाईकोर्ट ने स्वीकारा..ज़मानत की शर्तें विशेष अदालत NIA तय करेगी
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By NPG News

रायपुर,1 दिसंबर 2021। छत्तीसगढ़ की ख्याति लब्ध अधिवक्ता सुधा भारद्वाज जो कि भीमा कोरेगाँव केस में बतौर अभियुक्त गिरफ़्तार थी,उन्हें हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई है। डिफ़ॉल्ट बेल के आवेदन को हाईकोर्ट ने स्वीकार करते हुए निर्देशित किया है कि वे आठ दिसंबर के पहले विशेष अदालत NIA में आवेदन करें, ज़मानत की शर्तें NIA की विशेष अदालत तय करेगी।

सुधा भारद्वाज की छवि छत्तीसगढ में सक्रिय वकील मानवाधिकार कार्यकर्ता की है। वे जनजातीय कार्य मंत्रालय, नेशनल एडवाइज़री काउंसिल पर आदिवासी मुद्दों से जुड़ी कमेटी का हिस्सा रह करती हैं। वे 2017-18 में दिल्ली के नेशनल लॉ कॉलेज में बतौर मेहमान शिक्षक पढा चुकी हैं। उनको लेकर 2013 में यह चर्चा हुई थी कि उन्हें हाईकोर्ट में जस्टिस पद का प्रस्ताव दिया गया था।वे अमेरिका में पैदा हुई लेकिन क़रीब 11 बरस की उम्र में वे भारत वापस आ गई थीं। 1986 में वे प्रख्यात श्रमिक नेता शंकर गुहा नियोगी और छत्तीसगढ जनमुक्ति मोर्चा के संपर्क में आईं।

मुद्दों को लेकर लड़ाई लड़ने की वजह से चर्चित सुधा भारद्वाज की हालाँकि जो छवि महाराष्ट्र पुलिस और NIA बनाते हैं वह बिलकुल जुदा है। NIA के अनुसार वे शहरी नक्सली हैं और अर्धसैनिक बलों को फँसाने और हथियारबंद हमलों की योजनाओं में शामिल रहती हैं।

हालाँकि जिस आधार पर हाईकोर्ट ने उन्हें ज़मानत दी है वह है डिफ़ॉल्ट। यह स्थिति तब बनती है जबकि क़ानून के अनुसार गिरफ़्तारी से अधिकतम अवधि 60,90 और 180 दिन मामले में जाँच के लिए प्रदान की जाती है, और कोई आरोप पत्र दाखिल नहीं किया जाता तो आरोपी ज़मानत पर रिहा होने का अधिकारी हो जाता है इसे डिफ़ॉल्ट बेल कहा जाता है।

इसके मायने यह है कि NIA नियत समय पर सुधा भारद्वाज के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं कर पाई। सुधा भारद्वाज बीते चार साल से हिरासत में थीं।

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