बड़ी खबर: नियमित शिक्षक पद पर स्थानीय भर्ती की उम्मीद सजाए अभ्यार्थियों की बढ़ी मुश्किलें… अब नहीं होगा राजपत्र में कोई संशोधन…. इस बार की भर्ती में नहीं लागू होगा स्थानीय भर्ती का नियम….स्कूल शिक्षा के प्रमुख सचिव व कलेक्टरों को आदेश जारी…..पढ़िए आदेश में क्या लिखा है…

रायपुर 16 फरवरी 2020। प्रदेश में नियमित शिक्षकों के पद पर हो रही बंपर भर्ती में सरगुजा बस्तर संभाग समेत कोरबा जिले के उन अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है जो लगभग 15000 पदों पर हो रही भर्ती में स्थानीय भर्ती नियम लागू करवाने का प्रयास कर रहे हैं । छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव एस के सिंह ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और 13 जिलों के कलेक्टर को पत्र लिखकर आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया है जिसमें स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया है कि अधिसूचना में संशोधन केवल एक बार के लिए ही दिया जाता है इसका सीधा सा मतलब है कि 30 जनवरी को जो अधिसूचना जारी की गई है उसमें अब दुबारा संशोधन नहीं होगा साथ ही भविष्य में होने वाली सभी भर्तियों में स्थानीय भर्ती नियम से संबंधित अधिसूचना लागू होगी इसके अलावा वर्तमान में हो रही भर्ती में यदि पद रिक्त रह जाते हैं उस स्थिति में स्थानीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी ।

क्या है इस आदेश के मायने

यह आदेश जितना सामान्य दिखाई दे रहा है दरअसल मामला उतना ही पेचीदा है। सरगुजा और बस्तर संभाग में पिछली सरकार ने सरकारी नौकरियों में जिले के मूल निवासियों को लाभ देने के उद्देश्य से यह नियम बनाया था की तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थानीय निवासियों की ही भर्ती की जाएगी जिसकी समय सीमा 31 दिसंबर 2018 को खत्म हो गई थी इसके बाद 26 जनवरी 2019 को प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने नियमित शिक्षकों के 15000 पदों पर भर्ती का ऐलान किया और मार्च में इसके लिए विज्ञापन भी जारी हो गया , इसके बाद जून-जुलाई में परीक्षा होने के बाद सरकार ने स्थानीय भर्ती अधिनियम को लागू करने के लिए राजपत्र प्रकाशित किया और इसके लागू होने की तिथि 1 जनवरी 2019 से तय की यानी भूतलक्षी प्रभाव से इस नियम को लागू किया गया । इसका सीधा मतलब था कि नियमित शिक्षक के पदों पर भी यह नियम लागू होना था और यह नियम लागू करते समय यह ध्यान ही नहीं दिया गया कि भूतलक्षी प्रभाव से लागू करने की स्थिति में नियमित शिक्षक भर्ती में विवाद खड़ा हो जाएगा क्योंकि परीक्षा हो चुकी थी अतः मैदानी इलाको के अभ्यर्थियों का कहना था कि इस भर्ती परीक्षा में यह नियम लागू नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें सीधे तौर पर नुकसान होगा और यदि ऐसा कुछ नियम था तो उसे परीक्षा से पहले आना था इधर चूंकि राजपत्र में 1 जनवरी से नियमों के प्रभावशाली होने की बात लिखी गई थी अतः बस्तर सरगुजा संभाग समेत कोरबा जिले के लोग यह मानकर चल रहे थे कि उन्हें इस नियम का लाभ होगा इधर शासन प्रशासन को भी यह बात समझ आ गई थी कि उनसे चूक हो गई है ऐसे में 30 जनवरी 2020 को एक बार फिर से राजपत्र में संशोधन किया गया और यह तय किया गया कि वर्तमान में हो रही शिक्षक भर्ती नियम में यह लागू नहीं होगा तथा आने वाली भर्ती में यह नियम लागू होंगे और अब उसी को स्पष्ट करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने पत्र जारी किया है साथ ही यह भी बताया है की अधिसूचना में अब संशोधन की गुंजाइश नहीं है । इधर पद रिक्त होने वाली जो बात लिखी है गई है उसकी भी संभावना बहुत कम है क्योंकि प्रदेश में लाखों की संख्या में बेरोजगारों ने परीक्षा दिया है ऐसे में उन इलाकों में पद रिक्त होने की संभावना बहुत कम है और मैदानी इलाके के अभ्यर्थी भी प्रदेश के किसी इलाके में जाकर नौकरी करने को तैयार बैठे हैं इसीलिए उन्होंने उन जिलों के विकल्प को चुना है ।

और बढ़ेगा बवाल… स्थानीय भर्ती के उम्मीदवारों की नाराजगी की मिलने लगी झलक

इधर इस आदेश के सामने आते ही स्थानीय भर्ती के समर्थकों में जबरदस्त नाराजगी दिखाई देने लगी है और वो सोशल मीडिया में जमकर आग उगल रहे हैं । उनका सीधा कहना है कि यह उनके अधिकारों का हनन है और राजपत्र में किसी प्रकार का कोई संशोधन होना ही नहीं चाहिए था । यह उनके और उनके भविष्य के साथ सीधे सीधे तौर पर मजाक है ऐसे में वह न्यायालय के साथ साथ अपने स्थानीय जनप्रतिनिधियों का भी दरवाजा खटखटाएंगे क्योंकि उनके हितों की रक्षा करना उनके स्थानीय नेताओं की जिम्मेदारी है , इसका सीधा सा मतलब है कि बस्तर सरगुजा संभाग समेत कोरबा जिले के नेताओं पर अब वहां के बेरोजगार दबाव बनाने की कोशिश करेंगे ताकि उन्हें लाभ मिल सके ऐसे में नेताओं के लिए भी यह धर्म संकट की स्थिति है कि आखिर अपने इतने बड़े वोट बैंक को नाराज करे तो करे कैसे…. कुल मिलाकर स्थिति यह बन गई है कि प्रदेश में परीक्षा दिए आधे बेरोजगारों का नाराज होना तय है क्योंकि स्थानीय भर्ती नियम लागू न होने से जहां मूलनिवासी नाराज हैं वही लागू कर दिए जाने से मैदानी क्षेत्र के अभ्यर्थियों में नाराजगी आना तय है अब देखना होगा कि आने वाले समय में क्या होता है प्रशासन ने तो अपना रुख स्पष्ट कर ही दिया है ।

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