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सिस्टम से बड़ी चूक: डॉक्टर की लोकप्रियता कोरोना प्रोटोकॉल पर भारी पड़ गई, अंतिम विदाई देने कलेक्टर, एसपी समेत उमड़ पड़ा हुजूम

बलौदाबाजार 20 जुलाई 2021। कोरोना से जिस डाक्टर की मौत हुई…उन्हें लोगोे ने कोरोना फैलाने वाली ही अंतिम विदाई दे दी। विदाई देने इतनी भीड़ उमड़ी कि ना पीपीई किट…ना मास्क और ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रहा। हैरत तो तब और बढ़ गयी, जब अंतिम संस्कार में 20 लोगों के शामिल होने का आर्डर जारी करने वाले खुद कलेक्टर सुनील कुमार जैन और लॉ एंड आर्डर संभालने वाले एसपी और जिले में स्वास्थ्य की कमान संभालने वाले CMHO भी उस भीड़ भरी अंतिम यात्रा में शरीक हो गये। अब भला जिम्मेदार ही नियम तोड़ने पर उतारू हो जाये तो फिर नियमों की धज्जियां उड़नी लाजिमी ही थी।

दरअसल बलौदाबाजार के कोविड अस्पताल में तैनात डॉ शैलेंद्र साहू की रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात संदिग्ध मौत हो गयी थी। मौत के पहले उन्होंने अपना कोविड टेस्ट कराया था, जिसमें उनकी रिपोर्ट पॉजेटिव आयी थी, उनकी मौत की वजह कोरोना ही बतायी भी जा रही है।

पॉजेटिव होने के बाद भी देखते रहे मरीज 

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ही बताया कि करीब 12 बजे उन्होंने टेस्ट कराया था, जिसमें वो पॉजेटिव आये थे, पॉजेटिव आने के बाद भी उन्होंने करीब ढ़ाई-तीन बजे तक मरीजों के वार्ड में राउंड लिया और नर्स और अन्य डाक्टरों के साथ मिलते रहे। हालांकि जैसे उन्होंने टेस्ट कराया था, नियम के मुताबिक उन्हें खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिये थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। सुबह जब स्टाफ उन्हें उठाने गया तब तक उनकी मौत हो गयी थी।

अंतिम यात्रा में हजारों लोगों की भीड़ 

डॉ शैलेंद्र साहू की मौत की असल वजह जानने के लिए उनका पोस्टमार्टम किया गया, जबकि अमूमन ऐसा होता नहीं है। पोस्टमार्टम के बाद जब उनके शव को रायपुर के महादेवघाट भेजा जा रहा था, तो उस दौरान कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ गयी। हास्पीटल स्टाफ, अधिकारी और आमलोगों की हजारों की भीड़ इकट्ठा हो गयी। हद तो तब हो गयी, जब श्रद्धांजलि और अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी पहुंच गये। आमलोगों और हास्पीटल स्टाफ भी काफी संख्या में जुट गये।

ना मास्क और ना ही सोशल डिस्टेंसिंग 

फूलों से सजी गाड़ी और देशभक्ति गीतों के साथ डाक्टर के शव को लेकर एंबुलेंस आगे बढ़ी तो हजारों की संख्या में लोगों का काफिला भी चल पड़ा। लोगों ने ना मास्क पहना था, ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा गया। हद तो तब हो गयी, जब एंबुलेंस में शव के साथ बैठे लोगों ने भी पीपीई किट नहीं पहना। कोरोना के महाप्रलय जब लाखों लोग आखिली वक्त में अपना का आखिरी वक्त में चेहरा देखने को तरस गये, परिजनों को मिलने तक की इजाजत नहीं दी गयी, ऐसे में कोरोना के लिए एक समर्पित डाक्टर की अंतिम विदाई में ऐसी लापरवाही क्यों बरती गयी। हैरानी की बात ये रही कि इस दौरान कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी उस अंतिम यात्रा में शामिल रहे। ऐसे में सवाल तो उठना लाजिमी है कि जहां 20 लोगों को ही अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत हो, उस जिले में हजारों की भीड़ अंतिम यात्रा में कैसे शामिल हो गयी।

बहुत लोकप्रिय थे शैलेंद्र साहू 

बलौदाबाजार के कोविड अस्पताल में करीब डेढ़ साल से डॉ शैलेंद्र पदस्थ थे। वो कोरोना मरीजों के लिए पूरी तरह से समर्पित रहे। युवा और मृदुभाषी डाक्टर शैलेंद्र की इलाज की शैली के मरीज काफी कायल रहे हैं। लिहाजा उनकी जब मौत की खबर जिलें में फैली, तो लोगों की सहानुभूति उमड़ पड़ी। क्या नेता, क्या अधिकारी या क्या आमलोग हर किसी ने उनकी मौत पर दुख जताया।

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