लॉकडॉउन में मालगाड़ी में बैठकर पहुँची नागपुर.. कलेजे के टुकड़े को लिया.. और मीलों चली पैदल.. छूप कर ट्रक में चढ़ी .. और पहुँची बिलासपुर.. अब क्वारनटाईन में

याज्ञवल्क्य मिश्रा

बिलासपुर, 8 अप्रैल 2020। यह कुछ फ़िल्मी सा मामला है.. पर सच है.. लॉकडॉउन था.. ट्रेनें बसें सब बंद थी.. माँ को अपना बेटा लाना था.. कोई साथ देने वाला नहीं था.. वो मालगाड़ी में बैठी.. और चार सौ किलोमीटर का सफ़र छूपते हुए उसने क़रीब दस घंटे से भी उप्र में तय किया और नागपुर पहुँची.. विदर्भ का वो ईलाका जहां कोविड 19 का क़हर बरप रहा है। रिश्तेदारों के यहाँ जहां कि बेटा था, उन्होंने हाथ खड़े कर दिए थे कि आप ले जाओ.. हालात के बेकाबू होने की खबर और कलेजे के टुकड़े को वापस लाने की जद्दोजहद में इस माँ ने जो जो किया वह आँखों को गीला भी करता है और स्तब्ध भी।

ये माँ अपने बेटे को ली.. और पैदल पैदल चलते हुए छत्तीसगढ की सीमा पर आ गई..नागपुर से छत्तीसगढ़ की सीमा का मतलब है क़रीब सौ किलोमीटर..। इसने वो सफ़र अपने बेटे के साथ कभी उसे गोद में लेकर तो कभी पीठ पर बांधकर तय किया..।सरहद पर एक ट्रक मिला.. जिससे वो दूर्ग पहुँची .. और दूर्ग से सब्ज़ी ले जाने वाले ट्रक पर बैठकर बिलासपुर।

जैसे ही मोहल्ले में पहुँची.. हंगामा बरप गया.. अप्रिय स्थिति बस होने को थी.. खबर विधायक शैलेष पांडेय को मिली तो स्वास्थ्य टीम के साथ पहुँचे। महिला और उसके बच्चे का प्रारंभिक टेस्ट हुआ.. और उसके घर को सेनेटाईज किया गया.. और क्वारनटाईन में रहने की हिदायत दी गई.. घर के सामने देहरी पर पर्चा भी चस्पा किया गया। विधायक शैलेष पांडेय और उनके साथियों ने उस महिला को खाने का सामान दिलाया.. और आश्वस्त किया कि दिक़्क़त नहीं होगी। बस वो क्वारनटाईन अवधि तक घर से ना निकले..।

महिला ने सहमति दी और कहा
“मेरे बेटे को मेरे से अलग मत करना..बाक़ी जो बोलेंगे वैसा करुंगी”

शैलेष पांडेय ने NPG से कहा
“ यह पूरा मसला स्तब्ध करने वाला है.. मानवता और ममत्व का मसला है.. पर सावधानी और सतर्कता का भी.. स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी रखेगा.. वो खुद भी क्वारनटाईन के लिए सहजता से तैयार है.. प्रारंभिक जाँच में कोई लक्षण नहीं है.. रोज़ाना अपडेट लेंगे..”

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