माओवादियों के ख़िलाफ़ बस्तर पुलिस शुरु कर रही है प्रचार अभियान ..बोले रेंज आईजी पी सुंदरराज – “बस्तर त माटा और बस्तर चो आवाज़ के नाम से क्षेत्रीय भाषाओं में माओवादियों का आदिवासी विरोधी सच सार्वजनिक करेंगे”

जगदलपुर,15 सितंबर 2020। नक्सलवाद के ख़िलाफ़ ख़ंदक की लड़ाई लड़ रही बस्तर पुलिस ने अब माओवादियों के प्रचार अभियान को भी काउंटर करने का फ़ैसला किया है। बस्तर पुलिस बस्तर के गाँव गाँव तक पहुँच कर बस्तर की क्षेत्रीय बोली भाषा में माओवादियों को लेकर उन तथ्यों को रखेगी जिसके आधार पर पुलिस यह कहती रही है कि माओवादी आदिवासी विरोधी और विकास विरोधी हैं।


इसके तहत बस्तर पुलिस ने क्षेत्रीय बोली भाषा में पोस्टर पॉंपलेट तैयार कराए हैं, जिनमें माओवादियों को लेकर चित्रों के माध्यम से पुलिस यह बताने की समझाने की कोशिश करेगी कि, माओवादी सड़क स्कुल पुल उद्योंगो का विरोध कर विकास का विरोध करते हैं । माओवादियों द्वारा की गई हज़ार से उपर आदिवासियों की हत्या को लेकर भी इन पोस्टरों में सवाल है कि जो आदिवासियों को ही क्रूरता से मारते हैं वो खुद को आदिवासी हितैषी का झूठा दावा करते हैं।IG बस्तर पी सुंदरराज ने कहा
“बस्तर पुलिस विश्वास विकास और सुरक्षा की त्रिवेणी कार्ययोजना पर काम कर रही है,हम बहुत तेज़ी से नागरिकों का विश्वास हासिल कर रहे हैं और हमें अहम सहयोग मिल रहा है। हमने अब तय किया है कि बस्तर की लोक बोलियों भाषाओं में हम नागरिकों तक सच पहुँचाएँगे, इनमें बैनर पोस्टर शॉर्ट फ़िल्में, ऑडियो क्लिप, गीत संगीत नृत्य शामिल है, यह गोंडी भाषा में बस्तर त माटा और हल्बी भाषा में बस्तर चो आवाज के नाम से बस्तरिहा तक पहुँचेगा, इसमें आम बस्तरिहा नागरिक ही शामिल हैं जो इसे तैयार कर रहे हैं.. और प्रचार प्रसार की जवाबदेही भी निभाएँगे”
बस्तर पुलिस की यह नीति दरअसल “शठ प्रति शाठ्यम समाचरेत” की नीति का अनुपालन है। माओवादी अपनी नीतियों के प्रचार प्रसार के लिए सांस्कृतिक दल बनाकर सक्रिय होते हैं और बस्तर के आदिवासियों को प्रभावित करते हैं। बस्तर पुलिस इसी तरीक़े का उपयोग कर माओवादी सोच पर हमला करने जा रही है।

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