ASP यशपाल के IPS अवार्ड में बड़ा रोड़ा …..पुलिस आफिसर्स एसोसिएशन ने IPS एसोसिएशन को लिखा पत्र…. BSF से संविलियन रद्द करने व IPS अवार्ड से अलग रखने की मांग

रायपुर 1 अक्टूबर 2020। IPS अवार्ड को लेकर विवादों में चल रहे ASP यशपाल सिंह के प्रमोशन का पेंच अब और फंस गया है। EOW में संपत्ति मामले में दर्ज शिकायत के बाद अब छत्तीसगढ़ स्टेट पुलिस आफिसर्स एसोसिएशन ने IPS अवार्ड से यशपाल से अलग करने को लेकर पत्र लिखा है। एसोसिएशन के सचिव पंकज चंद्रा ने छत्तीसगढ़ IPS एसोसिएशन को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। पंकज चंद्रा ने अपने पत्र में लिखा है कि यशपाल सिंह का बीएसएफ से छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस सेवा में साल 2016 में संविलियन किया गया, जो 2005 के भर्ती व पदोन्नति नियम के विपरीत है। यही नहीं राज्य पुलिस सेवा के अलग-अलग वर्गों की तरफ हाईकोर्ट में तीन याचिकाएं भी इस बाबत दायर की गयी है, यही नहीं CAT जबलपुर में भी इस मामले में याचिका लंबित है।

सचिव पंकज चंद्रा ने इस मामले में आईपीएस एसोसिएशन से समर्थन मांगते हुए राज्य पुलिस सेवा संवर्ग में संविलियन को निरस्त करने और IPS अवार्ड से उसे अलग करवाने की मांग की है। पत्र में उस मामले का भी जिक्र किया गया है, जिसमें EOW की तरफ से यशपाल सिंह के खिलाफ मामला दर्ज होने की बता कही गयी है। यशपाल सिंह क अनुशासनहीन बताते हुए कहा गया कि ट्रांसफर के बाद भी यशपाल सिंह ने बीजापुर में आज तक अपनी ज्वाइनिंग नहीं दी। पत्र में कार्यकारिणी सदस्य मनोज कुमार खिलारी, जेआर ठाकुर, लखन पटले व माहेश्वर नाग जैसे अधिकारियों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दिया है।

EOW में दर्ज है यशपाल सिंह के खिलाफ मामला

PHQ को 8 सितंबर को अपने भेजे पत्र में EOW ने कहा है कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विशेष आसूचना में पदस्थ यशपाल सिंह के खिलाफ 2019 में करोड़ों की संपत्ति हासिल करने की शिकायत दर्ज करायी गयी है, जिसकी जांच चल रही है। जाहिर है EOW की इस रिपोर्ट के बाद यशपाल सिंह का IPS अवार्ड अटक सकता है।वहीं धर्मेंद्र सिंह छावई, दर्शन सिंह मरावी, उमेश चौधरी, मनोज कुमार खिलारी और रवि कुमार कुर्रे के खिलाफ किसी भी तरह की कोई शिकायत दर्ज नहीं है। बता दें कि इस साल राज्य पुलिस सेवा के दो अफसरों का IPS अवार्ड होना है, जिसके लिए 1998 बैच के 6 अफसर लाइन में हैं। इनमें पहला नंबर धर्मेंद्र सिंह छवई का, दूसरा दर्शन सिंह मरावी और तीसरा यशपाल सिंह का नाम है। इसके बाद उमेश चौधरी, मनोज खिलारी और रवि कुरे हैं। छवई मध्यप्रदेश पीएससी से 1996 में डीएसपी सलेक्ट हुए थे।

कौन हैं यशपाल सिंह, जो विवाद की वजह हैं

यशपाल सिंह बीएसएफ में डिप्टी कमांडेंट थे, जो 2009- 10 में प्रतिनियुक्ति पर छत्तीसगढ़ आए हैं। आरोप है कि राजनीतिक रसूख का फायदा उठाते हुए उन्होंने 2016 में अपना गलत ढंग से छत्तीसगढ़ पुलिस में संविलियन कर लिया गया और कमाल की बात तो ये उन्हें 1997 की सीनियरिटी भी दी गई। छत्तीसगढ़ का अस्तित्व ही वर्ष 2000 में आया था, तब वर्ष 2009 में दूसरे राज्य से प्रतिनियुक्ति में छत्तीसगढ़ आने वाले को राज्य पुलिस सेवा में वर्ष 1997 की वरिष्ठता कैसे दे दी गयी, ये समझ से परे हैं। इस कारण अब वे आईपीएस अवार्ड के दावेदार हो गए हैं, जबकि छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस सेवा के कई अफसर उनसे सीनियर हैं। लेकिन अब वे पीछे रह जाएंगे। सीनियर होने के बाद भी उनका आईपीएस अवार्ड रूक जाएगा। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने यशपाल सिंह का संविलियन और सीनियरिटी दिए जाने की प्रक्रिया को ही अवैधानिक और नियम विरूद्ध बताया है।

इसी तरह दूसरे राज्यों से छत्तीसगढ़ पुलिस सेवा में संविलियन का जुगाड़ कर रहे अधिकारियों के संविलियन पर रोक लगाने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 1997 बैच के राज्य पुलिस सेवा के करीब 70 पुलिस अफसरों को आईपीएस अवार्ड हो चुका है और बाकी अधिकारियों का अगले दो चरणों में आईपीएस अवार्ड होना है। इसमें वर्ष 1998 बैच के पुलिस अधिकारियों को भी लाभ मिलने की संभावना है। लेकिन दूसरे राज्यों से संविलियन कराकर सीनियरिटी लेने वालों से राज्य पुलिस सेवा के अफसरों के आईपीएस अवार्ड होने पर खतरा मंडरा रहा है।

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