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10 साल की मन्नत के बाद पैदा हुए थे अंकुश…..21 साल की उम्र में पायी शहादत, 10 महीने पहले ही ड्यूटी की थी ज्वाइन……भाई ने खाना-पीना छोड़ा

10 साल की मन्नत के बाद पैदा हुए थे अंकुश…..21 साल की उम्र में पायी शहादत, 10 महीने पहले ही ड्यूटी की थी ज्वाइन……भाई ने खाना-पीना छोड़ा
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By NPG News

चंडीगढ़ 19 जून 2020। लद्दाख के गलवान घाटी में चीन के साथ मुठभेड़ में हिन्दुस्तान के युवाओं ने अपनी जिंदगी न्यौछावर कर देश के प्रति अपना फर्ज अदा किया है. ऐसे ही एक युवा हैं हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के रहने वाले 21 साल के जवान अंकुश ठाकुर।शहीद अंकुश अपनी खुद की कमाई के पैसों से गांव में घर के लिए थोड़ी सी जमीन और लग्जरी कार खरीदना चाहते थे।

इसका जिक्र वह हमेशा अपने माता-पिता से घर पर और फोन पर किया करता था। परिवार वर्ष 2021 में अंकुश ठाकुर की शादी की तैयारियों में जुटा था। माता-पिता की शादी के 10 वर्ष बाद अंकुश ठाकुर के रूप में पहली संतान हुई थी। शादी के काफी समय बाद औलाद होने पर माता-पिता ने बड़े प्यार दुलार से बेटे की परवरिश की। पढ़ाया-लिखाया और जब वह 20 वर्ष का हुआ तो सेना में भर्ती हो गया। अंकुश से छोटा बेटा आदित्य भी अपने भाई से उम्र में 10 वर्ष छोटा है। छोटा बेटा आदित्य अभी 13 वर्ष का है और सातवीं कक्षा में पढ़ता है।

10 महीने बाद ही हुए शहीद

अंकुश ठाकुर 2018 में पंजाब रेजीमेंट में भर्ती हुए थे. वह हमीरपुर के कड़होता गांव के रहने वाले हैं. अंकुश भले ही लगभग 2 साल पहले सेना में शामिल हुए थे, लेकिन ट्रेनिंग खत्म होने के बाद 10 महीने पहले ही उन्होंने ड्यूटी ज्वाइन की थी.

पिता और दादा भी रह चुके हैं आर्मी में

अंकुश के पिता और दादा भी सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. गांव के नौजवान बेटे के बलिदान से यहां गमगीन माहौल है. परिवार और गांव में शोक फैला हुआ है।शहीद अंकुश ठाकुर का छोटा भाई 13 वर्षीय आदित्य ठाकुर कहता है कि बड़े भाई ने कहा था कि वह जल्द ही फौज से छुट्टी लेकर घर आएगा और उसे एंड्रायड स्मार्ट फोन खरीदकर देगा। आदित्य ने कहा कि उसे फोन नहीं चाहिए, बस भगवान बड़ा भाई लौटा दे। जब से बड़े भाई के शहीद होने की खबर मिली है, तब से आदित्य ने अन्न ग्रहण नहीं किया।

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