IT (Digital Code) Rules 2026: सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हो, हो जाओ सावधान! ऑनलाइन कंटेंट पर नकेल कसने जा रही है सरकार, IT डिजिटल कोड नियम 2026 का ड्राफ्ट तैयार
IT (Digital Code) Rules 2026: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर केंद्र सरकार अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।
नई दिल्ली | Jan 27, 2026 | ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर केंद्र सरकार अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार IT (डिजिटल कोड) नियम 2026 का मसौदा तैयार कर रही है। इसका मकसद डिजिटल कंटेंट के लिए क्लियर और लागू करने लायक सीमाएं तय करना है।
क्या है नया?
प्रस्तावित नियमों में धर्मों या समुदायों पर हमला करने वाले, भड़काऊ, फेक या सामाजिक मर्यादा के खिलाफ कंटेंट पर रोक लगाने का प्रावधान है। इसके साथ ही सभी डिजिटल कंटेंट को उम्र के हिसाब से वर्गीकरण करना मैंडेटरी किया जाएगा।
क्यों लाए जा रहे हैं नए नियम?
यह पहल सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद सामने आई है जिसमें कहा गया था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए संवैधानिक रूप से परमिटेड रेस्ट्रिक्शन को सुनिश्चित किया जाए। इसी लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के तहत नए मसौदा नियमों का प्रस्ताव रखा है।
किस कंटेंट पर होगी सख्ती?
ड्राफ्ट के अनुसार ऐसी सामग्री प्रतिबंधित होगी जो:
- शालीनता और सामाजिक मर्यादा का उल्लंघन करे
- धर्मों या समुदायों को निशाना बनाए
- मानहानिकारक या फेक जानकारी फैलाए
- अपराध, हिंसा या अश्लीलता का महिमामंडन करे
- महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगों या किसी सामाजिक समूह को अपमानित करे
उम्र के हिसाब से दिखेगा कंटेंट
नए नियमों में हिंसा, यौन संबंध, अश्लीलता, अभद्र भाषा, ड्रग्स और डरावने दृश्यों जैसे फैक्टर्स के आधार पर कंटेंट को वर्गीकृत किया जाएगा। हर डिजिटल कंटेंट पर U, 7+, 13+, 16+, केवल वयस्क जैसी आयु-रेटिंग दिखाना अनिवार्य होगा।
देखने से पहले जरूरी शर्तें
13 साल से ऊपर की U/A रेटिंग वाले कंटेंट के लिए पैरेंटल कंट्रोल सिस्टम लागू होगा। वहीं केवल वयस्क कंटेंट के लिए भरोसेमंद आयु-सत्यापन सिस्टम अनिवार्य की जाएगी। सरकार ने कहा है कि मौजूदा IT नियम, 2021 के सभी प्रावधान नए मसौदा नियमों के साथ लागू रहेंगे।
क्या है बड़ा सन्देश?
IT (डिजिटल कोड) नियम 2026 सरकार के उस संतुलन को दर्शाता है, जिसमें डिजिटल फ्रीडम के साथ-साथ सार्वजनिक नैतिकता और नाबालिगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।