कलेक्टरों से पंगा नहीं

Update: 2022-08-28 11:30 GMT

संजय के. दीक्षित

तरकश, 28 अगस्त 2022

कहते हैं, जिनके घर शीशे के होते हैं, उन्हें दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं मारना चाहिए। वरना....। एक मंत्रीजी के साथ ऐसा ही हुआ है। मंत्रीजी ने प्रस्तावित भारत माला प्रोजेक्ट के अंतर्गत फोरलेन के अगल-बगल की कई एकड़ जमीन खरीद ली। किसानों को भी पता होता है कि सामने वाले गरजू है, लिहाजा रेट भी अनाप-शनाप लगाया। मंत्रीजी को भी मालूम था कि कितनी भी महंगी जमीन है, उसे टुकड़े करने पर लागत की तुलना में कई गुना निकल जाएगा। मगर कलेक्टर ने मंत्रीजी का पूरा गुड़ गोबर कर दिया। ट्रांसफर होने से पहले फोर लेन का एरिया बदलने का प्रस्ताव एनएचए को भेजा दिया और वह एप्रूव भी हो गया। अब मंत्रीजी ने जिस जगह पर जमीनें खरीद ली थी, वहा रोड नहीं बन रहा। ऐसे में मंत्रीजी के पास हाथ मलने और कलेक्टर को कोसने के अलावा कोई चारा नहीं है।

सिकरेट्री कौन?

छत्तीसगढ़ में महिला बाल विकास का फिलवक्त सिकरेट्री कौन है, यह यक्ष प्रश्न बन गया है। कोई जवाब देने की स्थिति में नहीं है। दरअसल, रीना बाबा कंगाले के पास यह विभाग था। मगर जब वे लंबी छुट्टी पर गईं तो महिला बाल विकास का प्रभार भुवनेश यादव को दिया गया। आदेश में स्पष्ट तौर पर लिखा था कि रीना बाबा के अवकाश से लौटते तक भुवनेश महिला बाल विकास संभालेंगे। रीना अब छुट्टी से लौट आई हैं। उन्होंने जीएडी में ज्वाइनिंग देकर निर्वाचन का कार्यभार संभाल लिया। मगर महिला बाल विकास का प्रभार ग्रहण नहीं कीं। उधर, रीना के आते ही भुवनेश ने महिला बाल विकास की फाइले करनी बंद कर दी। सही भी है...जीएडी के आदेश में था कि रीना के लौटते तक...। उधर, रीना ने महिला बाल विकास में ज्वाइंनिंग दी नहीं। बताते हैं, महिला बाल विकास में इतना बलंडर हो रहा कि रीना जाकर अपना हाथ जलाना नहीं चाह रहीं। उधर, जीएडी के एक लेटर से मामला और पेचीदा हो गया। जीएडी ने रीना से महिला बाल विकास वापस लेने की अनुमति लेने के लिए भारत निर्वाचन आयोग को पत्र भेज दिया, जो कि व्यवहारिक प्रतीत नहीं होता। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को अगर राज्य सरकार कोई विभाग देना चाहती है तो उसके लिए निर्वाचन आयोग की अनुमति आवश्यक है। मगर विभाग लेने के लिए इजाजत मांगने का कोई तुक समझ से बाहर है। इस चक्कर मे महिला बाल विकास हफ्ते भर से बिना सिकरेट्री का हो गया है। विभाग में फाइलों का अंबार लगता जा रहा है।

बीजेपी में कश्मकश

प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के बाद बीजेपी में जिला अध्यक्ष के साथ अन्य पदाधिकारियों को भी बदला जाना है। इसको लेकर पार्टी के नेता कश्मकश में हैं...पद लें या विधायक की टिकिट के लिए दावेदारी करें। असल में, नेताओं को दोहरा डर है। अगर पार्टी कहीं जिला अध्यक्ष बना दी या प्रदेश संगठन में कोई अहम पद दे दिया तो विधायक की टिकिट से पृथक न कर दें। और, संगठन में कोई पद नहीं लिया और विधायक की टिकिट भी नहीं मिली तो न घर के रहे न घाट के। भाजपा नेताओं की उलझन समझी जा सकती है। अभी जो जिला अध्यक्ष हैं, वे विधायकी के मोह में पद छोड़ना तो चाहते हैं मगर ये भी तो नहीं कि उन्हें टिकिट मिल ही जाए।

मंत्री ने पंचायत छोड़ा और...

मंत्री टीएस सिंहदेव के पास दो बड़े विभाग थे। पंचायत और स्वास्थ्य। सिंहदेव ने पंचायत से इस्तीफा दे दिया। और अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग छोड़ दिया। मंत्रालय में इसको लेकर खूब चुटकी ली जा रही है। जाहिर है, स्वास्थ्य विभाग के दोनों जिम्मेदार अधिकारी डेपुटेशन के लिए रिलीव हो गए हैं। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य डॉ0 मनिंदर कौर द्विवेदी और डायरेक्टर हेल्थ नीरज बंसोड़ को भारत सरकार में पोस्टिंग मिल गई है। स्वास्थ्य विभाग भी पिछले तीन दिन से खाली है। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि आम आदमी के जानमाल से जुड़े विभाग के सिकरेट्री और डायरेक्टर दोनों एक साथ डेपुटेशन पर चले गए। अब दिक्कत यह है कि नए अधिकारियों को लाया जाएगा तो उन्हें हेल्थ के सिस्टम को समझने में टाईम लग जाएगा।

एक और आईएएस!

45 हजार करोड़ के सम्राज्य के मालिक राकेश झुनझुनवाला को इस बात को लेकर बड़ा मलाल था कि उन्होंने अपने हेल्थ में सबसे कम इंवेस्ट किया। और शायद यही कारण रहा कि स्वास्थ्यगत समस्याओं से जूझते हुए उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। ये सिर्फ झुनझुनवाला के साथ नहीं है....अनेक ऐसे दृष्टांत मिल जाएंगे। एक स्टडी में ये बात सामने आई है कि 90 फीसदी लोग स्वास्थ्य के प्रति बेहद लापरवाह होते हैं। खासकर भारत में...जो लोग नियमित जीम और कसरत करते हैं, उनका ओवर कांफिडेंस तो और ज्यादा होता है। बॉडी अलार्म करती है, मगर वही....नजरअंदाज। छत्तीसगढ़ की आईएएस एम गीता बड़े कम समय में चली गईं। सुना है, एक और आईएएस को गंभीर बीमारी हो गई है...ईश्वर से प्रार्थना है, उन्हें शीघ्र स्वस्थ्य करें...लंबी आयु दे।

उम्र 65 का, और...

छत्तीसगढ़ के नौकरशाहों के लिए रिटायर्ड आईएएस दिनेश श्रीवास्तव नजीर बन सकते हैं। दिनेष 65 के होने जा रहे होंगे, मगर लुक पचपन का है। याद होगा, मैराथन दौड़ में युवा अधिकाकारियों को उन्होंने पीछे छोड़ दिया था। पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग के लिए भी दिनेश ने राजनेताओं के आगे-पीछे नहीं किया। चुपचाप एनएमडीसी में एडवाइजर ज्वाईन कर लिए। और, बढ़ियां सम्मान पूर्वक जीवन यापन कर रहे हैं। वरना, आईएएस अधिकारियों को 55 के होते ही गाड़ी, बंगला, रुतबा छिन जाने का भय सताने लगता है। तब तक रीढ़ की उनकी हड्डी बची भी नहीं होती। 33 साल की नौकरी में राजनेताओं के सामने झुकते-झुकते रीढ़ की सभी 33 हड्डी टूट चुकी होती है। रिटायरमेंट के आखिरी साल में आईएएस अधिकारी चाटुकारिता की इतनी पराकाष्ठा कर देते हैं कि सरकारें धर्मसंकट में पड़ जाती हैं...बैठने कहा जाता है तो सो जा रहा...इसे क्या दिया जाए। कहने का आशय यह है कि पोस्टिंग के मायाजाल में फंसकर अफसर जबरिया टेंशन मोल लेते हैं।

पुलक हुए पुलकित

पुलक भटाचार्य रायपुर में एसडीएम रहे हैं। नगर निगम में एडिशनल कमिश्नर। और अभी जीएडी और स्कूल षिक्षा में अंडर सिकरेट्री। पुलक का यहां उल्लेख इसलिए खास है कि भोपाल में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में खराब मौसम की वजह से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का प्लेन टेकअप नहीं हो पाया। उनके साथ चीफ सिकरेट्री, पीएस होम समेत कई शीर्ष अधिकारी भी प्लेन से जाने वाले थे, वे भी यहीं फंस गए। ऐसे में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मीटिंग में छत्तीसगढ़ से कोई मौजूद था तो पुलक थे। वे एक दिन पहले भोपाल चले गए थे। अब इतनी बड़ी मीटिंग में शिरकत करने का अवसर मिल गया, पुलकित होना लाजिमी है।

अच्छा काम

अक्सर देखने में यह आता है कि थानों में बड़ी संख्या में लावारिस गाड़ियां यूं ही पड़े-पड़े कंउम हो जाती हैं, मगर उस पर पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करती। जांजगीर पुलिस ने इस दिशा में आज अच्छा काम किया। एसपी विजय अग्रवाल ने लावारिस गाड़ियों की नीलामी की और सरकार के खजाने में एकमुश्त 64 लाख रुपए आ गए। इससे पहले विजय ने जशपुर में किया था। बलौदा बाजार के कप्तान दीपक झा भी गाड़ियों की नीलामी से हैंडसम अमाउंट राजकोष में जमा करा चुके हैं। गृह मंत्री या डीजीपी को बाकी कप्तानों को भी इस बारे में ताकीद करना चाहिए। उससे फायदा यह होगा कि गाड़ियां यूज में आ जाएंगी और सरकार के खजाने में कुछ पैसे भी।

गृह मंत्री का आईना

गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू दिखते हैं शांत और संतुलित। लेकिन बड़ी चतुराई से उन्होंने रायपुर पुलिस को आईना दिखा दिया। एक तो बिना किसी हो-हंगामे के पुलिस कंट्रोल पहुंच गए बैठक लेने। फिर पूरा डिटेल ले गए थे...किस इलाके में कौन सट्टा खिला रहा है...नाम सहित बता दिया। किस इलाके में रहजनी हो रही है और उसकी वजह क्या है। गृह मंत्री ने एक तरह से कहें तो अपना दामन सफाई से बचा लिया। उनके बोलने का हो गया, मैंने तो पुलिस अधिकारियों को पूरा बता दिया...उस पर अमल नहीं करते तो अब क्या किया जाए।

अंत में दो सवाल आपसे

1. डॉ0 रमन सिंह को पार्टी नेताओं से जिस तरह वेटेज मिल रहा, उससे क्या आपको लगता है कि अगले विधानसभा चुनाव में वे सीएम फेस होंगे?

2. केंद्रीय गृह मंत्री अमित षाह के कार्यक्रम के संचालन का दायित्व मिलने से समझा जाए कि पूर्व आईएएस ओपी चौधरी का पार्टी में प्रभाव बढ़ा है?

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