महक उठे आस्था के केंद्र
लोक आस्था के केंद्रों को विकसित कर रही छत्तीसगढ़ सरकार
रायपुर 21 फरवरी 2023I चाहे राजिम का पुन्नी मेला हो नया पहचान देना हो, या शिवरीनारायण को उसका पुराना गौरव लौटाना। माता कौशल्या की भूमि चंद्रखुरी को राष्ट्रीय मानचित्र पर उभारना हो या फिर हर छोटे-बड़े गांव-शहर के आस्था के केंद्र। भूपेश बघेल की सरकार ने छत्तीसगढ़िया संस्कृति और मिट्टी की महक के साथ मेला, मड़ई ही नहीं देवताओं के मंदिरों को उनका पुराना गौरव लौटाया है। भूपेश बघेल की सरकार ने चार पिछले चार साल में गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के नारा को चरितार्थ किया है। सभी क्षेत्र में पहचान बनाई है। आदमी के हैसियत बदले हैं। किसान से लेकर गौ पालक, भूमिहीन गरीब मजदूर, महिला स्वालम्बन आदि योजनाओं से इतिहास रच रहा है। मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक शोषण को दूर करते हुए आस्था का नया प्रतिमान स्थापित किया है। जिससे पूरे प्रदेश का गौरव और अभिमान जुड़ा है। कोरिया से सुकमा तक 2200 किमी में रामवनगमनपथ को विकसित करने काम हो रहा है। कौशल्या महोत्सव मनाने का हमने निर्णय किया है। शिवरीनारायण में और राजिम में अधोसंरचना विकसित किया जा रहा है, ताकि तीर्थयात्रियों को अधिकतम सुविधा मिल पाए। राजिम में 55 एकड़ क्षेत्र को मेला परिसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। राजिम में तीर्थयात्रियों को रहने की सुविधा यहां मिल पाएगी। गुरू घासीदास से जुड़े तीर्थस्थलों में भी अधोसंरचना और सुविधा जुटा रहे हैं। आर्थिक रूप से प्रदेश को बेहतर करने और शिक्षा स्वास्थ्य से संबंधित सुविधा जुटाने का कार्य सरकार कर रही है। राजिम में 55 एकड़ क्षेत्र में विकास कार्य किया जा रहा है। यहां पर मेले में आने वाले यात्रियों के लिए रहने की सुविधा भी होगी। इसके पहले मेला नदी तट तक फैला रहता था जिससे नदी में मुरूम भरने से दिक्कत आने की आशंका थी। अब नये परिसर से यह दिक्कत दूर होगी। ठकुराइन टोला में 3 करोड़ रुपए की लागत से सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जा रहा है तथा 17 करोड़ रुपये की लागत से लक्ष्मण झूला बनाया जाना है। संत पवन दीवान जी द्वारा इस मंदिर का लोकार्पण किया गया था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजिम दौरे के दौरान कहा कि आज गरीब परिवार और गांव के बच्चे भी अंग्रेजी स्कूल में पढ़ रहे हैं और समाज को गढ़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आज संस्कृति के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की देश में एक अलग पहचान बन चुकी है। देश का एकमात्र कौशल्या मंदिर चंदखुरी में है। अब हर साल यहां कौशल्या उत्सव मनाया जाएगा, जहां देश भर से कलाकार शामिल होंगे। राजिम को पहले कुंभ मेले के नाम से जाना जाता था, अब इसे राजिम माघी पुन्नी मेला के नाम से जाना जाता है। यह मेला 15 दिनों तक चलता है और यहां लोक कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं। आज राजिम, शिवरीनारायण और डोंगरगढ़ सहित धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर ठहरने की व्यवस्था की गई है। आप यहां जाइए दर्शन करने के बाद रुके और आसपास घूमकर आइए।
राजिम पुन्नी मेला में बिखरती छत्तीसगढ़िया संस्कृति की खुशबू
राजिम माघी पुन्नी मेला के समापन समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सबसे पहले राजीव लोचन मंदिर में जाकर पूजा अर्चना की। इसके पश्चात लक्ष्मण झूला में ईरिक्शा चढ़कर सीधे श्रीकुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने जल चढ़ाकर अभिषेक किया और प्रदेश की खुशहाली के लिए कामना की। मुख्य महोत्सव मंच से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पहले जिस नाम से यह मेला हो रहा था, उसमें छत्तीसगढ़ी खुशबू नहीं आती थी, परंतु अब संस्कृति की महक बराबर फैल रही है। 12 सौ साल पहले कुलेश्वर नाथ महादेव का निर्माण देवी सीता ने किया था। पंचकोशी यात्रा से लेकर अनेक खूबियां इस भूमि की है। रामचंद जी ने सर्वाधिक 10 साल यहां बिताया। छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा रामायण प्रतियोगिता में प्रथम आने वाले मंडली को 12 हजार पंचायत को 5 हजार पुरस्कार, जनपद स्तर पर 10 हजार, जिला स्तर पर 50 हजार प्रदान किया गया और राज्य स्तर पर हुंए प्रतियोगिता में लाखों रूपए देकर पुरस्कृत किया गया है। देश में कहीं भी ऐसा आयोजन नहीं होता है, आज सिर्फ छत्तीसगढ़ में हो रहे। आस्था के केन्द्र को विकसित करने का काम हमारी सरकार कर रही है। राजिम पहले भी था, आज भी है और आगे भी रहेगा। नवीन मेला ग्राऊण्ड को विकसित करने का काम कर रहे हैं। कहीं भी भेदभाव हम नहीं कर रहे हैं। सबका बराबर विकास हो रहा है। नृत्य संगीत को सहेजने का काम हो रहे है। गौ माता की सेवा केवल छत्तीसगढ़ में किया जा रहा है। मेला स्थल में तीन दिनों तक चले राज्य स्तरीय रामायण प्रतियोगिता में प्रथम ज्ञान गंगा मानस परिवार बचेली दंतेवाड़ा को पांच लाख का चेक एवं स्मृति चिन्हा, प्रमाण पत्र, रामायण ग्रंथ तथा राजकीय गमछे के साथ पुरस्कृत किया गया। द्वितीय स्थान माधुरी महिला मानस मंडली गरियाबंद को तीन लाख को चेक तथा तृतीय स्थान जांजगीर चांपा जिले के मानस मंडली सरहर को दो लाख का चेक प्रदान किया गया। इस दौरान भव्य आतिशबाजी का प्रदर्शन किया गया।
60 एकड़ में लगेगा माघी पुन्नी मेला
आने वाले सालों में अब 60 एकड़ आरक्षित भूमि पर माघी पुन्नी मेला लगेगा। इसके लिए 100 करोड़ की राशि लगेगा। टेण्डर की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। फोर लेन सहित अनेक काम होंगे। धर्मस्व मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि राजिम धर्म, आस्था और संस्कृति की भूमि है। पैरी, सोढ़ूर एवं महानदी के संगम में मेला लगता है। राजिम में सर्वाधित राम वनगमन परिपथ के अंतर्गत 19 करोड़ का काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किया है, जो यहां के संस्कृति, रहन-सहन और खान-पान में जुड़ा है। इसलिए अब छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया कह सकते हैं। मेला समापन होने के बाद भी आने वाले चार दिनों तक चलती है, इसलिए प्रशासन की सारी व्यवस्थाएं यथोचित रहेगी। संस्कृति एवं जिले के प्रभारी मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि राजिम आस्था, विश्वास एवं संस्कृति का समागम है। यहां की भव्यता के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। विदेश के भी रामायण यहां हुए हैं। यह सबसे बड़ा उदाहरण है। राजिम विधायक अमितेश शुक्ल ने कहा कि स्वयं शिव भगवान मेला में आते हैं और मनोकामना को पूरी करते हैं। श्याम भैया हमेशा विकास की बात करते थे। सिंचाई की सुविधा, सड़कों का जाल पर ज्यादा ध्यान दिया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल लगातार विकास पर ध्यान दे रहे हैं। आने वाले समय में दोबारा मुख्यमंत्री अवश्य बनेगा। दो-तीन महीने में लगातार राजिम आएं हैं, जबकि इतना तो पाटन भी नहीं गए हैं। उनका राजिम के प्रति प्रेम और स्नेह है, जो स्पष्ट दिख रही है। अभनपुर विधायक धनेन्द्र साहू ने कहा कि राम के नाम पर वोट की राजनीतिक चल रही थी। हमारी सरकार ने राम पर ही काम करके दिखा दिया। रामायण प्रतियोगिता से राम की कथा को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। मेला में अपार भीड़ रही है, जो यहां के व्यापार व्यवसाय को उन्नति का अवसर दे रहा है। आने वाला साल यहीं पर राजिम माघी पुन्नी मेला फिर से लगेगा।
4 साल में हुए अभूतपूर्व काम: भूपेश बघेल
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दुर्ग जिले के ग्राम कौही में आयोजित मेले में भी शामिल हुए। इस अवसर पर 11 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश समृद्धि की राह पर है। साधु संत कहते हैं कि शिव भाव से ही सारे जीवों की सेवा करना है। हमने इसे ही लक्ष्य माना है। ईश्वर के आशीर्वाद और आप के सहयोग से हम यह कार्य कर रहे हैं। आप सभी की मंगलकामना भगवान भोलेनाथ से करता हूं। हमेशा की तरह इस बार भी कौही मेले में हजारों श्रद्धालु मौजूद हैं। भगवान शिव को औधड़दानी कहते हैं। जहां भी शिव विराजे हैं वहां मेले लगे हैं। भगवान शिव का आशीर्वाद हम पर है। इसी तरह ग्राम ठकुराइन टोला में महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव की पूजा अर्चना करने पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश के तीर्थ स्थलों को विकसित करने की दिशा में हम व्यापक कार्य कर रहे हैं। मंदिर में हर वर्ष तीर्थ यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि प्रदेश में तेजी से आर्थिक विकास हुआ है और शिक्षा तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अधोसंरचना विकास तेज हुआ है मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में धान उत्पादक किसानों को अपनी मेहनत का सबसे अच्छा मूल्य मिल रहा है और किसानों का संतोष हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है। उन्होंने निषाद समाज द्वारा मंदिर परिसर के विकास के लिए किए गए कार्यों की प्रशंसा की। जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखण्ड के मयाली नेचर पार्क के समीप स्थित ऐतिहासिक मधेश्वर महादेव मंदिर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने मंदिर में महादेव की आरती कर क्षेत्र, प्रदेश और देश के लोगों की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। साथ ही मधेश्वर पर्वत के तराई में स्थित मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए गुफा का अवलोकन किया। साथ ही मंदिर निर्माण के इतिहास के सबंध में जानकारी ली। इस दौरान मंदिर परिसर में ग्रामीणों द्वारा मानस नृत्य गायन के माध्यम से मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया गया।