Bihar Budget 2026 : नीतीश सरकार का मेगा बजट आज; 3.5 लाख करोड़ से युवाओं और रोजगार पर रहेगा बड़ा फोकस
Bihar Budget Aaj : बिहार की भाजपा सरकार आज विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेगी। वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव की तरफ से पेश किए जाने वाले बजट में 10% से अधिक के उछाल का अनुमान है। मुख्य फोकस 1 करोड़ नौकरी के वादे और बुनियादी ढांचे पर रहेगा
Bihar Budget 2026 : नीतीश सरकार का मेगा बजट आज; 3.5 लाख करोड़ से युवाओं और रोजगार पर रहेगा बड़ा फोकस
Bihar Budget Aaj : बिहार की भाजपा सरकार आज विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेगी। वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव की तरफ से पेश किए जाने वाले बजट में 10% से अधिक के उछाल का अनुमान है। मुख्य फोकस 1 करोड़ नौकरी के वादे और बुनियादी ढांचे पर रहेगा
Bihar Budget Aaj : पटना : प्रदेश के आर्थिक भविष्य के लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। नीतीश सरकार आज पेश करने जा रहे हैं बिहार का बजट। CM नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA की नई पारी का ये पहला सम्पूर्ण बजट है, जिसे वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव सदन के सामने रखेंगे। पिछले 2 सालो में बिहार के बजट का दायरा 26 हजार करोड़ से बढ़कर 3.17 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। अनुमान है कि इस बार बिहार का बजट साढ़े तीन लाख करोड़ के पार पहुँच जायेगा। चुनाव में किए वादों और राज्य की बढ़ती उम्मीदों के साथ, आज का बजट विकास की गति तय करेगा, और ये पता चलेगा कि सरकार रोजगार और पेंशन जैसे बड़े खर्चों का हिसाब-किताब किस प्रकार रखती हैं
नौजवानों के लिए नौकरियों की सौगात की उम्मीद
चुनाव के दौरान नीतीश सरकार ने 1 करोड़ नौकरी और रोजगार का जो संकल्प पत्र जारी किया था, उसकी झलक इस बजट पिटारे में दिखने की उम्मीद है। सरकार युवाओं के लिए कौशल विकास और नए पदों के सृजन के लिए खास फंड आवंटन कर सकती है। हालांकि, इस पर काम बहुत पहले से चल रहा है। क्योकि ये NDA सरकार का पहला बजट है, इसलिए सामाजिक कल्याण और रोजगार योजनाओं पर बड़ा दांव लगाया जा सकता है?
बजट पर भारी सैलरी और पेंशन की देनदारी
बिहार सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक खर्चों का प्रबंध करना हैं| वेतन पर 2020-21 में 20658.91 करोड़ खर्च होता था, वो 2025-26 में बढ़कर 81473.45 करोड़ हो गया हैं| सैलरी के साथ-साथ पेंशन और पुराने कर्जो के ब्याज के भुगतान पर भी हजारों करोड़ो खर्च हो रहे हैं। जरुरी खर्चों की वजह से विकास कार्यों के लिए फंड जुटाना दोनों में संतुलन बनाना मुश्किल कार्य बन गया है।
केंद्र पर निर्भरता कम करना बड़ी चुनौती
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार अपनी जरूरतों का केवल 27% राजस्व ही खुद जुटा पाता है, जो गुजरात और महाराष्ट्र जैसे विकसित प्रदेशों की तुलना में बहुत कम है। हालांकि, सरकार की राजस्व वसूली में पहले से सुधार हुआ है, लेकिन इस बार भी बिहार को केंद्र से मिलने वाले पैसे और मदद के भरोसे ही रहना होगा। जानकारों का मानना है कि बजट में इस बार भी 10% से अधिक की बढ़त देखी जाएगी, जिससे बजट का कुल दायरा एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।