….इस इलाके में नहीं चलती एम्बुलेंस, 20 किमी खाट पर ढोकर पहुंचाया गर्भवती महिला को अस्पताल….

बीजापुर 15 मई 2020। इन गाँवो में लाल लड़ाकों की हुकूमत आज भी कायम है। 21वीं सदी में जहां आज हमारा देश चांद पर पहुंच गया। लेकिन जिले में अभी ऐसे गांव है जो आज भी जंगली इलाको में बसे हुए है। इन गाँवों में आज भी एम्बुलेंस नहीं जा सकती क्योंकि इन इलाकों में नक्सलियों का राज है। नक्सलियों ने जगह जगह सड़क काट दिए है और नक्सलियों की इतनी दहशत है कि आज भी इन इलाको में जाने के लिए प्रशासन को भी मावोवादियो से इजाजत लेनी पड़ती है।

ग्रामीण इतने विवश है कि वो इस चिलचिलाती गर्मी में 20 किमी का पैदल सफर कर जंगल, नदी, पहाड़ी इलाको को पार कर अस्पताल पहुंचते है। ऐसा ही एक नजारा गुरुवार को एनपीजी की टीम को दिखाई दिया। गंगालूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक महिला को भर्ती किया गया। इस महिला के इलाज के लिए गांव वाले और उनके परिजन को 20 किमी का पैदल सफर करना पड़ा और खटिये में महिला को रखकर उसे अपने कंधों पर लादकर गंगालूर अस्पताल इलाज के लिए लाया गया।जब ग्रामीण उसे ला रहे थे तो हमें यह नजारा दिखाई दिया।

जब हमने महिला के पति व ग्रामीणों से बात की तो उन्होंने अपनी व्यथा बताई हम मेटापाल गांव से है।मेरी पत्नी जमली तेंदूपत्ता तोड़ने गई थी अचानक उसे चक्कर आ गया हम डर गए और हमने खांट पर इसे बिठाया और अपने कंधों पर उठाकर 20 किमी से ज्यादा पैदल चलकर हम अस्पताल पहुंचे। गंगालूर के डॉ सत्यप्रकाश खरे ने बताया कि महिला 3 माह के गर्भ से है। इसे जरूरी दवाइयां दी गई है अब महिला की हालत ठीक है। जहां सरकार विकास के बड़े बड़े दावे करती है। वहीं यह तस्वीर सरकार के मुंह पर एक जोरदार तमाचा है।आजादी के 70 साल बाद भी ग्रामीण इस तरह के संघर्ष करने को मजबूर है।

मेटापाल की तरह गंगालूर अस्पताल में इलाज के लिए आने के लिये कई ऐसे गांव है जो आज भी विवश है।इनमें एडसमेटा,पीडिया, गमपुर, तोड़का, तामोडी,हिरोली, कावड़गांव,कमकानार, पुसनार आदि गांव है। बारिश के दिनों में इन गांवों में टूट पड़ता है दुःखों का पहाड़ – बारिश के दिनों में इनके पास चलने के लिए टूटी फूटी सड़क मार्ग भी नहीं बचती ये बड़ी मुश्किल से अपने खाने पीने के लिए राशन ले जा पाते है। ये सारे गांव जिला से कट जाते है।

इन गांवों में मलेरिया के सबसे ज्यादा मरीज 

डॉ सत्यप्रकाश खरे ने बताया कि गंगालूर अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीजों में मलेरिया की शिकायत मिलती है। एनपीजी को ग्रामीणों ने बताया कि जब हमारे गांव में बारिश में किसी का स्वास्थ्य बिगड़ता है तो ग्रामीण सर पर हाथ देकर बैठ जाते है। प्रशासन और सरकार को भी इन गाँव वालों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं दिखाई देती। सरकार अपनी नाकाफी छुपाने के लिए नक्सलियों का भय बता कर पल्ला झाड़ लेती है और इन बिचारे ग्रामीणों को दुखदायी कष्ट झेलना पड़ता है।

संवाद सूत्र – गुप्तेश्वर जोशी 

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