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“आज़ादी के अमृत महोत्सव पर अखिल भारतीय कार्टून प्रतियोगिता” एवं “कार्टून प्रदर्शनी”

रायपुर, 21 सितंबर 2021। देश की एकमात्र कार्टून पत्रिका “कार्टून वॉच” अपने रजत जयंती वर्ष पर “संस्कृति विभाग” के सहयोग से कार्टून प्रतियोगिता एवं कार्टून प्रदर्शनी का आयोजन करने जा रही है. कार्टून वॉच के सम्पादक त्र्यम्बक शर्मा ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि “आज़ादी के अमृत महोत्सव” विषय पर अखिल भारतीय कार्टून प्रतियोगिता का […]

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“आज़ादी के अमृत महोत्सव पर अखिल भारतीय कार्टून प्रतियोगिता” एवं “कार्टून प्रदर्शनी”
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रायपुर, 21 सितंबर 2021। देश की एकमात्र कार्टून पत्रिका “कार्टून वॉच” अपने रजत जयंती वर्ष पर
“संस्कृति विभाग” के सहयोग से कार्टून प्रतियोगिता एवं कार्टून प्रदर्शनी का आयोजन करने जा रही है.
कार्टून वॉच के सम्पादक त्र्यम्बक शर्मा ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि “आज़ादी के अमृत महोत्सव” विषय पर अखिल भारतीय कार्टून प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है. यह प्रतियोगिता ऑनलाइन की जाएगी और ऑनलाइन ही इसके नगद पुरस्कार प्रदान किए जाएँगे.
प्रथम पुरस्कार 10,000/- द्वितीय पुरस्कार 7,000/- तृतीय पुरस्कार 5,000/-और बीस विशेष पुरस्कार 1,000/- (प्रत्येक) रखे गए हैं. इस प्रतियोगिता में कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है और अधिकतम तीन प्रविष्टयां ई मेल [email protected] पर भेज सकता है. अधिक जानकारी कार्टून वॉच की वेबसाइट, फ़ेसबुक पेज, और इंस्टाग्राम पेज से प्राप्त की जा सकती है. इ
श्री शर्मा ने आगे बताया कि प्रतियोगिता की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2021 है. उन्होंने आगे बताया कि
“आज़ादी के अमृत महोत्सव” पर दो दिवसीय कार्टून प्रदर्शिनी का भी आयोजन महंत घासीदास म्यूज़ीयम के आर्ट गैलरी में किया जाएगा. आगामी 2 और 3 अक्टूबर 2021 को यह कार्टून प्रदर्शिनी लगाई जाएगी जिसमें 50-60 साल पहले के 100 पुराने कार्टून प्रदर्शित किए जाएँगे. इस प्रदर्शिनी में कार्टूनिस्ट शंकर, मारियो मिरांडा, आर के लक्ष्मण, बाल ठाकरे सहित अनेक पुराने कार्टूनिस्ट के कार्टून देखने को मिलेंगे. इसमें देश की पहली कार्टून पत्रिका ” शंकर्ष वीकली” के कार्टून के साथ “इलस्ट्रेटेड वीकली” और “धर्मयुग” सहित अनेक बंद हो चुकी पत्रिकाओं में प्रकाशित कार्टून प्रदर्शित किए जाएँगे. उल्लेखनीय है कि कार्टून वॉच पुराने करतूनिस्टों के काम को “ऑनलाइन कार्टून म्यूज़ीयम” के माध्यम से सहेजने का प्रयास कर रही है. यह प्रदर्शिनी कार्टून के माध्यम से इतिहास में झांकने का अच्छा अवसर होगा और नई पीढ़ी उन कार्टूनों को देख सकेगी जो उनके जन्म से भी कई दशक पहले के हैं.

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