सिर्फ 53 रुपये MSP बढ़ने पर कृषि मंत्री रविंद्र चौबे मोदी सरकार पर भड़के, कहा- लगता है अभी केंद्र सरकार क्वारंटीन से बाहर नहीं निकली है….छत्तीसगढ़ की 2500 रुपये की बराबरी में 16 साल लगेंगे केंद्र को…. 20 लाख करोड़ के पैकेज में किसानों को एक रुपया भी नहीं मिलने की कही बात..

रायपुर 2 जून 2020। धान के समर्थन मूल्य में महज 53 रूपये की बढ़ोत्तरी पर प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने प्रेस कांफ्रेंस कर मोदी सरकार को किसानों के साथ अन्याय करने वाली सरकार करार दिया। कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में रविंद्र चौबे ने आरोप लगाया कि कोरोना संकट में जो 20 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान केंद्र सरकार ने किया था, उस पैकेज का एक पैसा भी किसानों के खाते में नहीं आया है। 20 लाख करोड़ का पैकेज सिर्फ लोन मेला का हिसाब जैसा साबित हुआ। उन्होंने कहा कि

“जिस तरह के वादे केंद्र सरकार की तरफ से किये गये थे और जिस तरह के स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के आधार पर मूल्य निर्धारित करने की बात कही जा रही थी, उसे देखकर उम्मीदें जगी थी कि कुछ बेहतर केंद्र की सरकार सोच रही है, लेकिन समर्थन मूल्य में 53 रूपये की वृद्धि किसान के साथ अन्याय है”

रविंद्र चौबे ने केंद्र सरकार के उस बयान को लेकर भी आड़े हाथों लिया, जिसमें ये दावा किया गया था कि किसान अब स्वतंत्र है और वो अपनी फसल कहीं भी बेच सकता है। कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ये सरासर झूठ बोल रही है, पहले भी किसान अपनी मर्जी से अपने फसल को कहीं भी बेच सकता था, किसानों का टमाटर पहले भी पाकिस्तान तक जाता था।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश को क्वारंटीन से बाहर आने की बात कह रही है, लेकिन जिस तरह से 53 रुपये की मामूली वृद्धि केंद्र की तरफ से हुई है, उसे देखकर यही लगता है कि वो खुद ही अभी क्वारंटीन से बाहर नहीं आ पायी है। कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि

“छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार के 16 महीने हुए हैं, जिसमें से आचार संहिता के 3 महीने और 2 महीने के लॉकडाउन को निकाल दिये जाये तो प्रदेश की सरकार को 1 साल ही हुआ है, इस दौरान किसानों के लिए प्रदेश सरकार ने सरकार ने उल्लेखनीय काम किये हैं। 2 साल से प्रदेश सरकार 2500 रुपये समर्थन मूल्य दे रही है, जिस तरह से केंद्र की सरकार ने 53 रुपया समर्थन मूल्य बढ़ाया है, उस आंकड़े से छत्तीसगढ़ सरकार के 2500 रुपये की खरीदी तक पहुंचने में केंद्र को 16 साल लग जायेंगे”

उन्होंने कहा मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों से वादाखिलाफी की है। केंद्र से किसानों को कुछ नहीं मिला। यहां तक कि जो किसान सम्मान निधि देने की बात की जा रही है, वो भी प्रदेश के महज पौने दो लाख किसानों तक पहुंच पाया है, जबकि प्रदेश में 27 लाख रजिस्टर्ड किसान हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश की बात की, उस हिसाब से किसानों को समर्थन मूल्य करीब 2350 रुपये से ज्यादा होना चाहिये थे। मंत्री रविंद्र चौबे ने इस मामले में किसानों के समर्थन मूल्य पर दोबारा विचार करने को कहा है।

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