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ब्लैक फंगस के बाद अब व्हाइट फंगस ने ढ़ाना शुरू किया कहर…. स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर….ब्लैक फंगस और कोरोना से भी है खतरनाक..जानिये क्या कहते हैं एक्सपर्ट

ब्लैक फंगस के बाद अब व्हाइट फंगस ने ढ़ाना शुरू किया कहर…. स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर….ब्लैक फंगस और कोरोना से भी है खतरनाक..जानिये क्या कहते हैं एक्सपर्ट
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By NPG News

नयी दिल्ली 21 मई 2021। देश में स्वास्थ्य मसले पर हर दिन चुनौतियां बढ़ती जा रही है। पहले कोरोना, फिर ब्लैक फंगस और अब व्हाइट फंगस का प्रकोश शुरू हो गया है। बिहार में एक साथ चार व्हाइट फंगस ने हेल्थ विभाग में हड़कंप मचा दिया है। बताया जा रहा है कि व्हाइट फंगस का कहर ब्लैक के मुकाबले काफी अधिक है. बताते चलें कि कोरोनावायरस के प्रकोप के बीच देश में ब्लैक फंगस पिछले कई दिनों से कहर बरपा रही है.

जानकारी के मुताबिक पटना के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में व्हाइट फंगस के चार नए केस मिले हैं. पीएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड प्रो. एस.एन सिन्हा ने मीडिया को बताया कि हमारे यहां चार मरीज आएं, जिनका कोरोना रिपोर्ट निगेटिव था, लेकिन हालत लगातार खराब होते जा रही थी. जब हमने टेस्ट किया तो, उनमें व्हाइट फंगस का लक्षण दिखा.

ब्लैक फंगस से खतरनाक है व्हाइट फंगस

यह बीमारी ब्लैक फंगस से भी ज्यादा खतरनाक (More Dangerous Than Black Fungus) बताई जा रही है. कहा जा रहा है कि व्हाइट फंगस से भी कोरोना की तरह फेफड़े संक्रमित होते हैं. वहीं शरीर के दूसरे अंग जैसे नाखून, स्किन, पेट, किडनी, ब्रेन, प्राइवेट पार्ट्स और मुंह के अंदर भी संक्रमण फैल सकता है.

क्या है लक्षण

प्रो एस.एन सिन्हा की मानें तो व्हाइट फंगस के मरीजों में कोरोना और ब्लैक फंगस जैसे लक्षण ही अमूमन होते हैं. कई बार आरटीपीसीआर कराने पर इसका पता नहीं लग पाता है. व्हाइट फंगस के मरीज का फेफड़ा बहुत तेजी से संक्रमण का शिकार होता है. इसके साथ ही जिन मरीजों में व्हाइट फंगस का लक्षण होता है, उनके शरीर के दूसरे अंग जैसे नाखून, स्किन, पेट, किडनी, ब्रेन, प्राइवेट पार्ट्स और मुंह के अंदर भी संक्रमण तेजी से फैलता है.डॉक्टर्स का कहना है कि अगर एचआरसीटी में कोरोना के लक्षण दिखाई देते हैं तो व्हाइट फंगस का पता लगाने के लिए बलगम कल्चर की जांच जरूरी है. उन्होंने बताया कि व्हाइट फंगस का कारण भी ब्लैक फंगस की तरह की इम्युनिटी कम होना ही है. उन लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है जो डायबिटीज के मरीज हैं. या फिर लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाएं ले रहे हैं.

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