आखिरकार खींच ही लिया शिक्षाकर्मियों ने सरकार का ध्यान अपनी ओर…. ट्वीटर पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष शिक्षाकर्मियों को लगातार दे रहे हैं जवाब*

रायपुर 3 नवंबर 2019। संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मी जन घोषणा पत्र के अनुरूप अपने संविलियन की घोषणा को लेकर लगातार आवाज बुलंद कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया को अपना हथियार चुना है । लोकवाणी में सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने के बाद अब ट्विटर के जरिए हजारों शिक्षाकर्मी रोज #संविलियन करो सरकार मुहिम के जरिए मुख्यमंत्री पंचायत मंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री और काँग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तक अपनी बात पहुंचा रहे है ।

अब एक तरफा चल रही इस मुहिम में दोनों तरफ से संवाद होने लगा है , शिक्षाकर्मियों के द्वारा संविलियन को लेकर किए जा रहे पोस्ट पर स्वयं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने शिक्षाकर्मियों को ट्विटर के जरिए ही इस बात का आश्वासन देना शुरू कर दिया है कि सरकार तक उनकी बात पहुंच रही है और इस पर सरकार के द्वारा निर्णय लिया जाएगा जिसे एक बेहतर पहल माना जा सकता है साथ ही इस बात की भी तस्दीक करती है की शिक्षाकर्मियों का यह अभियान व्यर्थ नहीं गया क्योंकि उनका जो मकसद है वह सरकार तक अपनी बात पहुंचाना था जो लगातार पहुंच रहा है और यदि स्वयं प्रदेश अध्यक्ष सामने आकर जवाब दे रहे हैं इसका मतलब है कि सरकार भी शिक्षाकर्मियों की मांग को लेकर विचार अवश्य कर रही हैं ।

इस मुहिम के बारे में “संविलियन अधिकार मंच” के प्रदेश संयोजक विवेक दुबे का कहना है कि

प्रदेश में अब केवल 25 हजार शिक्षाकर्मी संविलियन के लिए शेष है जो लंबे समय से शासन को अपनी सेवाएं दे रहे हैं और सरकार ने हमसे संविलियन का वादा भी किया है जिस पर हमको पूरा विश्वास है इसीलिए हम सोशल मीडिया ट्विटर और फेसबुक के जरिए लगातार सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि हमारी समस्या का अंत हो जाए । यह हमारे लिए भी अच्छी बात है कि चाहे लोकवाणी हो या फिर टि्वटर इसके माध्यम से सरकार तक हमारी आवाज पहुंच रही है और हम बिना स्कूल बाधित किए अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं । हम आशा करते हैं कि इस बार हमें निराश नहीं होना पड़ेगा और जन घोषणा पत्र के अनुरूप बचे हुए शिक्षाकर्मियों का संविलियन स्कूल शिक्षा विभाग में कर दिया जाएगा इसके लिए हम आपके माध्यम से भी सरकार से अपील करते हैं कि बचे हुए शिक्षाकर्मियों के संविलियन की घोषणा करके हमेशा हमेशा के शिक्षाकर्मी प्रथा का समापन कर दिया जाए ।

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