बैंक अधिकारी एसोसियेशन का आरोप, सिंघोड़ा बैंक मैनेजर को बिना किसी साक्ष्य के एसीबी द्वारा गिरफ्तार किया गया

रायपुर, 13 अक्टूबर 2020। ग्रामीण बैंक आफिसर्स एसोसियेशन ने बैंक मैनेजर की गिरफ्तारी पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि बिना किसी तथ्य के यह कार्रवाई की गई।
ज्ञातव्य है, महासमुंद जिले के सिंघोड़ा में 9 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के मैनेजर व सहायक चैकीदार को किसान से 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। एसोसिएशन का कहना है कि 9 अक्टूबर को राज्य ग्रामीण बैंक की शाखा सिघोडा के शाखा प्रबंधक मनीष और भृत्य हेमलाल को बिना किसी आधार और बिना कारण के जिला एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा गिरप्तार कर भष्टाचार अधिनियम के अंतर्गत रंगे हाथ घोषित किया है। यह कार्यवाही पूर्णतः बेमानी और पडयंत्र का हिस्सा है।
एसोसियेशन ने मीडिया को बयान जारी कर कहा है कि संतराम और उसकी मां का सिघोडा शाखा में केसीसी ऋण हैं। जिसमे ऋण बकाया है और कर्ज शेष होने के कारण उसकी कृषि भूमि पर भुइयां पोर्टल में बैंक का प्रभार दर्ज हैं। संतराम को बताया गया था कि कर्ज अदा करने के बाद भुइयां पोर्टल से कृषि भूमि पर प्रभार हटा दिया जायेगा। इसी काम के लिए संतराम ने 09 अक्टूबर को रकम लेकर बैंक आया और प्रचलित परम्परा अनुसार बैंक के भृत्य हेमलाल को ऋणपुस्तिका देकर रकम जमा करने को दे दिया। भृत्य ने रकम कैश काउंटर में जमा करने दे दिया। ऋणपुस्तिका शाखा प्रबंधक को चेक कराने के लिए दे दिया ।
इसी बीच एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों ने बैंक आ कर भृत्य और शाखा प्रबंधक को गिरप्तार कर लिया। उन्हें बताया भी गया कि हममे से किसी ने कोई रिश्वत नही लिया है। बैंक के सामान्य लेनदेन को रिश्वतखोरी बता कर शाखा प्रबंधक और भृत्य को गिरफ्तार कर लेने से सभी छत्तीसगढ़ के बैंक कर्मी दहशत में है। इस प्रकार की कार्यवाही घोर निंदनीय हैं। सभी कर्मचारियों ने शासन प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि कर्मचारी को तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही पंडयंत्र करने वाले अवांछित तत्वों का पता लगाकर उनके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करें। अगर ऐसा नही हुआ तो छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के समस्त अधिकारी और कर्मचारी संगठन संयुक्त रूप से बैंक का काम काज ठप्प कर आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा।

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