गिरफ्तार 2 मंत्रियों सहित 4 बड़े नेताओं को हाइकोर्ट से राहत नहीं, आज भी फैसला टला… नारद स्टिंग मामले में हुई थी गिरफ्तारी

कोलकाता 20 मई 2021। नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में गिरफ्तार किए गए ममता कैबिनेट के दो मंत्रियों सहित चारों बड़े नेता आज भी जेल में ही रहेंगे. इसकी वजह है कि इनकी जमानत पर आज एक बार फिर सुनवाई कलकत्ता हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और अभिजीत बनर्जी की खंडपीठ में होनी थी लेकिन इसे टाल दिया गया है. नारद स्टिंग मामले में गिरफ्तार परिवहन मंत्री फिरहाद हकीम, पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी, तृणमूल विधायक मदन मित्रा और कोलकाता के पूर्व मेयर शोभन चटर्जी न्यायिक हिरासत में हैं.
इसके पहले बुधवार दोपहर दो बजे वर्चुअल माध्यम से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायाधीश अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की, जो लगभग ढाई घंटे तक चली. बुधवार को मामले की सुनवाई पूरी नहीं हुई और गुरुवार को दोपहर दो बजे फिर सुनवाई की बात कही. इसलिए हाइकोर्ट ने चारों कद्दावर नेताओं की जमानत पर कोई फैसला नहीं सुनाया.
लिहाजा, चारों नेताओं को अभी जेल में ही रहना होगा. हालांकि, इस वक्त केवल फिरहाद हकीम ही प्रेसिडेंसी जेल में हैं. वहीं, अन्य तीन नेता शोभन चटर्जी, मदन मित्रा और सुब्रत मुखर्जी को तबीयत बिगड़ने के कारण एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
सोमवार को चारों नेताओं की गिरफ्तारी के बाद बैंकशाल कोर्ट में सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी को जमानत दे दी थी, लेकिन सीबीआई ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका दायर की और सोमवार देर रात हाइकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल व न्यायाधीश अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले पर स्थगनादेश लगा दिया.
इस मामले में सुनवाई को ट्रांसफर करने की सीबीआई की याचिका और सोमवार को सीबीआई की एक अदालत द्वारा दिये गये जमानत पर उच्च न्यायालय के स्थगन को वापस लेने की चारों नेताओं की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की पीठ गुरुवार को सुनवाई करने वाली थी. लेकिन, खंडपीठ के नहीं बैठने के कारण फैसला नहीं हो सका.
नारद स्टिंग मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किये गये चारों नेताओं को निचली अदालत ने जमानत दे दी थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने सोमवार की रात ही इस आदेश पर रोक लगा दी थी. इस आदेश पर पुनर्विचार के लिए बंगाल के इन चारों नेताओं ने हाइकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी थी.
