छत्तीसगढ़ के 3350 गोठान हुए जियो टैग, टैगिंग से पशुओं का नजदीकी गोठानों में व्यवस्थापन में होगी सहूलियत, लॉकडाउन के बाद बचे गोठानों का भी किया जाएगा जियो टैगिंग

रायपुर, 22 अप्रैल 2020। कृषि और पशुपालन विभाग ने 3350 गोठानों का जियो टैगिंग कंप्लीट कर लिया है। सूबे की सुराजी ग्राम योजना अंतगर्त नरवा, गरूवा, घुरूवा और बाड़ी के विकास से समग्र ग्रामीण विकास हेतु सतत और सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं।
गरूवा अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर बड़ी संख्या मे गौठानों का निर्माण किया गया है। जिससे न सिर्फ पशुओं का उचित व्यवस्थापन किया जा रहा है, अपितु विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के संचालन से आमदनी भी प्राप्त की जा रही है। गौठान में उत्पादित गोबर और गोमूत्र से कम्पोस्ट खाद, गमला, दिया, धूप बत्ती निर्माण इत्यादि गतिविधियां ली जा रही है। वर्तमान में प्रदेश भर की कुल 10005 ग्राम पंचायतों में से 5409 ग्राम पंचायतों में गौठान स्वीकृत किये जा चुके हैं। जिसमें से 1929 गौठान पूर्ण है तथा शेष निर्माणाधीन गौठानों के शीघ्रअतिशीघ्र पूर्ण करने कार्यवाही प्रगति पर है। प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में गौठान निर्माण को सुनिश्चित किये जाने हेतु नवीन गौठानों की स्वीकृतियां लगातार जारी की जा रही है। प्रदेश के गौठानों की सटीक लोकेशन ज्ञात करने के लिये गौठानों का जियो-टैगिंग किया गया है। वर्तमान में कुल 3350 गौठनों का जियो टैगिंग किया जा चुका है। जियो-टैगिंग किये जाने से ग्रामीणों को नजदीकी गौठान की जानकारी रहती है। जिससे पशुओं को नजदीकी गौठान में व्यवस्थापन में काफी सहुलियत होती है। प्रदेश के गौठानों की सटीक स्थिति ज्ञात करने के लिये विभागीय वेबसाइट में जियो-टैगिंग गौठान बटन दबाने पर नक्शे पर गौठान की स्थिति व फोटो की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जियो-टैगिंग करने से न सिर्फ गौठान की लोकेशन की जानकारी प्राप्त होती है बल्कि पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान, बधियाकरण इत्यादि कार्य संपादन हेतु पशुपालक एवं विभाग को सुविधा होती है। गौठानों का जियो-टैग का कार्य पशुधन विकास विभाग के कर्मचारियों द्वारा गौठान स्थान पर भौतिक रूप से पहुंच कर मोबाईल एप्लीकेशन का उपयोग कर अक्षांश एव देशांतर अंकित किया जाता है। लॉकडाउन उपरांत शेष गौठानों का भी जियो-टैगिंग कार्य प्राथमिकता से किया जावेगा।
लाभार्थि

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