कोरोना वैक्सीन की दिशा में 1 और बड़ा कदम, ‘कोविशील्ड’ के तीसरे चरण के चिकित्सीय परीक्षण के लिए नामांकन पूरा…..सीरम ने तैयार किए 4 करोड़ डोज… जानिये क्या होगा उसका…

नयी दिल्ली 13 नवंबर 2020। देश और दुनिया के कई हिस्सों से कोरोनावायरस की वैक्सीन को लेकर अच्छी खबरें अब आने लगी हैं. इसी कड़ी में पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने गुरुवार को कोरोना वैक्सीन कोविशील्‍ड (COVISHIELD) के क्‍लिनिकल ट्रायल के तीसरे चरण की एनरोलमेंट प्रक्रिया पूरी होने की घोषणा कर दी है.

इसके साथ ही ICMR और SII अमेरिकी दवा कंपनी नोवावैक्स की तरफ से विकसित की जा रही कोवोवैक्स के क्लिनिकल डेवलपमेंट में भी साथ मिल कर काम कर रहे हैं और सीरम इंस्टीट्यूट की तरफ से इसे आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है.

कोविशील्‍ड वैक्सीन के निर्माण में क्‍लिनिकल ट्रायल साइट की फीस आईसीएमआर भर रहा है, जबकि सीरम इंस्टीट्यूट वैक्सीन के बाकी खर्चे उठा रहा है.

1600 वॉलंटियर्स का एनरोलमेंट

वर्तमान में ICMR और SII ने देश के 15 अलग-अलग सेंटर्स पर तीन में से दो क्लिनिकल ट्रायल पूरे कर लिए हैं. वहीं तीसरे ट्रायल के लिए 31 अक्टूबर तक 1600 वॉलंटियर्स का एनरोलमेंट किया गया है.

आईसीएमआर ने अपने बयान में कहा कि अभी तक किए गए ट्रायल से आए नतीजों से यह विश्वास आया है कि कोविशील्‍ड वैक्सीन कोरोनावायरस के इलाज में कारगर साबित होगी. ICMR ने कहा, “भारत में अब तक एक मात्र कोविशील्‍ड वैक्सीन ही ऐसी है, जो ह्यूमन ट्रायल में सबसे बेहतर है.”

दो में से तीन ट्रायल से आए नतीजों के आधार पर ही आईसीएमआर की मददम से एसआईआई जल्द ही भारत में इस दवा को उपलब्ध कराने पर काम करेगा. हालांकि, भारत में किसी टीके को मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन SII ने चार करोड़ खुराक बनाई हैं.

चार करोड़ खुराक के डिस्ट्रीब्यूशन पर कुछ साफ नहीं

मालूम हो कि ‘कोविशिल्ड’ को SII पुणे लैब में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ‘एस्ट्राजेनेका’ (AstraZeneca) के एक मास्टर सीड के साथ विकसित किया गया है. सीरम ने इस बात पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की 4 करोड़ खुराक वैश्विक आपूर्ति के लिए है या सिर्फ भारत के लिए.

वहीं नोवावैक्स वैक्सीन के उत्पादन के लिए, सीरम ने कहा कि अमेरिकी कंपनी से वैक्सीन के थोक डिमांड आई है और जल्द ही उन्हें वैक्सीन दे दी जाएगी. बयान में कहा गया है कि वर्तमान में वैक्सीन का परीक्षण यूके, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका में बड़े स्तर पर परीक्षण किया जा रहा है.

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