सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, शिक्षकों की सैलरी अन्य से कम क्यों?…..जब वो सरकारीकर्मी नहीं तो क्यों लगाते हैं चुनाव ड्यूटी में ….सुप्रीम कोर्ट की सरकार पर तल्ख टिप्पणी

पटना 3 अगसस्त 2018। नियोजित शिक्षकों के मामले सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीखे सवाल पूछे। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि शिक्षकों को आखिरकार कम सैलरी क्यों मिल रहा है।  नियोजित शिक्षकों से जुड़े समान काम, समान वेतन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से तल्ख प्रश्न करते हुए कई तरह की टिप्पणी की. गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए बहस को जारी रखा. इस दौरान कोर्ट ने कई सवाल पूछे मसलन कि आईएएस, इंजीनियर समेत अन्य सभी अधिकारियों की सैलरी ज्यादा है, तो शिक्षकों की सैलरी कम क्यों है?

इस पर शिक्षा विभाग की तरफ से बहस कर रहे वकील ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन का मामला इनके साथ कहीं से नहीं बनता है. वहीं, दूसरी तरफ से शिक्षकों का पक्ष रखते हुए उनके वकील ने कहा कि इस मामले को जजों की पांच सदस्यीय खंडपीठ को सौंप देना चाहिए. इस पर कोर्ट ने कहा कि शिक्षक सम्मानित व्यक्ति हैं, उनके प्रति ऐसा व्यवहार क्यों है. इनकी सैलरी देने से संबंधित पूरे सिस्टम को सुधारने में कितना दिन लगेगा, ताकि सभी शिक्षक निश्चित होकर अपना काम कर सकें. सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण सवाल बहस के दौरान उठाते. अब पूरे मामले की अंतिम सुनवाई आगामी मंगलवार (7 अगस्त) को होगी. इस दिन इस पर फैसला आने की संभावना जतायी जा रही है.

सरकार ने तर्क दिया- नियोजित शिक्षक सरकारी कर्मी नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा- तब इन्हें चुनाव के काम में कैसे लगाते हैं। समान योग्यता है, तो फिर समान वेतन क्यों नहीं? अगर शिक्षक योग्य नहीं हैं तो फिर किस आधार पर इन्हें रखा गया? केंद्र और राज्य सरकार के तर्क को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एएम सप्रे और यूयू ललित ने सुना। केंद्र और राज्य सरकार के तर्क को शिक्षक संघों के वकील ने यह कहते हुए काटा कि जब 2015 में नियोजित शिक्षकों को वेतनमान और डीए दिया गया, तो फिर राज्यकर्मी कैसे नहीं हैं?