देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने में भारतीय ज्ञान परंपरा का अहम योगदान-श्री श्री शंकर भारती महाराज

बिलासपुर, 18 फरवरी 2022। गुरु घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सुबह 10 बजे से नवीन आईटी भवन के ई-क्लास रूम में परम पूज्य श्री श्री शंकर भारती महास्वामी जी महाराज मठाधिपति यडतोरे श्री योगानन्देश्वर सरस्वती मठ मैसूर, कर्नाटक द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा एवं अद्वैत वेदांत दर्शन पर लोक प्रबोधन एवं जन चेतना विषय पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने की।
परम पूज्य श्री श्री शंकर भारती महास्वामी जी महाराज मठाधिपति यडतोरे श्री योगानन्देश्वर सरस्वती मठ ने अपने उद्बोधन में कहा कि ज्ञान शब्द का अर्थ महान एवं व्यापक है। ज्ञान परंपरा हमारी संस्कृति का स्वरूप है। आदि शंकराचार्य ने ज्ञान परंपरा की जो व्यवस्था दी है, उसमें सर्वमंगल एवं सच्चिदानंद का भाव निहित है। राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता एवं अखंडता को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से आदि शंकराचार्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा को स्थापित करने के लिए देश के चारों हिस्सों उत्तर, दक्षिण, पूर्व एवं पश्चिम में मठों की स्थापना की। साथ ही उन्होंने समाज में बाह्य, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकता के लिए भी प्रेरित किया।
पूज्यपाद शंकाराचार्यजी ने अद्वैत वेदांत का सिद्धांत मानव के हित के लिए प्रतिपादित किया, जिसमें सद् चिद् आनंद ब्रह्म के स्वरूप से एकाकार होने के लिए मार्ग प्रदर्शित किया। महास्वामी जी ने जगत गुरु आदि शंकाराचार्य द्वारा विरचित सौंदर्य लहरी की महत्ता एवं व्याख्या की। गुरु सदमार्ग पर चलने के लिए सभी को पथ प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी को आत्मचितंन एवं आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। महास्वामी जी ने कहा कि हमें स्मरण रखना चाहिए कि हम शरीर मात्र नहीं हैं वरन शुद्ध चैतन्य आत्मा हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने कहा कि आज का दिन शुभ है क्योंकि श्री श्री शंकर भारती जी महाराज के पुण्य चरणों से विश्वविद्यालय की धरा आलोकित हुई है। उनके सद्वचनों से आज हम सभी अनुग्रहित हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और वेदांत हमारे जीवन के विभिन्न आयामों को प्रकाशित करते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा, वेदांत और संस्कृति को सर्वजन तक पहुंचाने का सकारात्मक प्रयास किया गया है।
कुलपति ने कहा कि महास्वामीजी के पुण्य आगमन मात्र से ही केन्द्रीय विश्वविद्यालय को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद नई दिल्ली से अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में श्रेष्ठतम शोध, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम (क्यूआईपी) प्रदान किया गया है। इसकी प्राप्ति से विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों की कतार में शामिल हो गया है। साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा शारीरिक शिक्षा विभाग को छह नये कार्यक्रम प्रदान किये गये हैं।
