जानें कैसे: होलिका दहन की अग्‍न‍ि देती है भव‍िष्‍य के संकेत

1 मार्च 2018। होली को दो द‍िन का त्‍योहार काा माना जाता है। होली के द‍िन रंग खेलने से एक शाम पहले होलिका दहन करने की परंपरा है। इसकी कथा भक्‍त प्रह्लाद से जुड़ी है। 2018 में होलिका दहन 1 मार्च की शाम को होगा। होलिका दहन के समय सभी लोग एक जगह आकर आग में आहुति देते हैं। होलिका में कच्चे आम, नारियल, भुट्टे या सप्तधान्य, चीनी के बने खिलौने, नई फसल का कुछ भाग गेहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर आदि की आहुति दी जाती है। साथ ही सभी के सुख की कामना भी की जाती है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार यह वर्ष का अंतिम प्रमुख त्योहार है जो आने वाले साल की सूचना भी देता है। इसलिए ज्योतिषशास्त्र में भी होलिका दहन का बड़ा महत्व है। यह फाल्‍गुन मास की पूर्ण‍िमा को आता है। मान्‍यता है कि होलिका की अग्नि से आने वाले साल का भविष्य भी जाना जाता है। स्‍पीक‍िंग ट्री हिंदी के एक लेख के अनुसार, आने वाला साल सुखमय होगा या फ‍िर व‍िपत्‍त‍ियों का सामना करना होगा – इसका अंदाजा आसानी से होलिका दहन की अग्‍न‍ि से लगाया जा सकता है।

– अगर होलिका दहन के समय दक्षिण दिशा की हवा चले तो यह अपशकुन माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे फसलों का नुकसान होगा। मंहगाई बढ़ती है और राज्य की सत्ता भंग होती है। जन विद्रोह होता है।

– होलिका दहन के समय हवा उत्तर की ओर से चलने लगे तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है। उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है। इसे धन की दिशा भी कहा गया है। माना जाता है कि इससे पूरे साल आर्थिक क्षेत्र में उन्नति होगी। धन और सुख बढ़ेगा।

– अगर होलिका दहन के समय धुआं सीधा आकाश की ओर जाने लगे तो यह बदलाव का सूचक है। यह संकेत है कि जिस व्यक्ति और शासक का वर्चस्व समाज और राजनीति में है उसकी सत्ता जाने वाली है। नई सत्ता और नई सरकार आने वाली है।

– पश्चिम दिशा से होलिका दहन के समय हवा चलने लगे तो यह भी अच्छा शगुन नहीं माना जाता है। इसकी वजह यह है कि इससे कृषि की हानि होती है। इसे बेकार खर पतवार की वृद्ध‍ि का योग भी माना जाता है।

होलिका दहन की कहानी काल से प्रह्लाद तथा भगवान विष्णु के अवतार नरसिंह के साथ जोड़ी जाती है। परन्तु इस तरह कुछ लोग इसे भविष्य जानने के लिये भी प्रयोग करते हैं।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.